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Home झारखण्ड बोकारो बीएसएल : 2006 तक साक्षात्कार आधारित ही थी कर्मचारी से अधिकारी बनने की प्रक्रिया

बीएसएल : 2006 तक साक्षात्कार आधारित ही थी कर्मचारी से अधिकारी बनने की प्रक्रिया

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बीएसएल : 2006 तक साक्षात्कार आधारित ही थी कर्मचारी से अधिकारी बनने की प्रक्रिया

वरीय संवाददाता, बोकारो.

बोकारो स्टील प्लांट सहित पूरे सेल में कर्मचारी से अधिकारी बनने की प्रक्रिया वर्ष 2006 तक साक्षात्कार आधारित ही थी. उस समय तक यह प्रक्रिया गैर विवादित भी थी. वर्ष 2008 में सेल के तत्कालीन डायरेक्टर (पर्सनल) ने उसको बदलकर वर्तमान स्वरूप दिया. तबसे हर बार इसमें विवाद और लेन-देन की शिकायतों की भरमार हो गयी. अब तो बात सीबीआइ तक पहुंच गयी है. सीबीआइ ने जूनियर आफिसर- 2022 के एक्जाम को लेकर एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जो चर्चा में है.

जूनियर आफिसर-2022 परीक्षा को लेकर बीएसएल सहित सेल कर्मी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं. परीक्षा को लेकर तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं. कह रहे हैं कि ई-0 परीक्षा प्रणाली में एस-06, एस-07 व कुछ एस-08 ग्रेड के कर्मी उम्मीदवार होते हैं. अंतिम रूप से शायद ही उक्त ग्रेड में कार्यरत कर्मियों का चयन होता है. कारण, नियम ही ऐसा बनाया गया है कि लिखित परीक्षा में कितना भी अंक ले आयें, लेकिन वरिष्ठता, साक्षात्कार आदि मद में उनको बहुत कम अंंक मिलता है. सोशल मीडिया पर कर्मी सवाल उठा रहे हैं कि जब वरिष्ठ कर्मचारियों का ही ई-0 परीक्षा में सलेक्शन होना है, तो फिर परीक्षा क्यों. डायरेक्टर, चेयरमैन तक के पद साक्षात्कार से भरे जा रहे है. कोल इंडिया में भी अधिकारी वर्ग में पदोन्नति साक्षात्कार से होती है. इसलिये इसमें बदलाव करने की जरूरत है.

बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ ने दिया सुझावबीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ ने रविवार को कर्मचारी से अधिकारी पद में पदोन्नति के लिए कुछ सुझाव भी सोशल मीडिया पर साझा किया है. कहा है कि पदोन्नति के लिए सिर्फ साक्षात्कार आयोजित की जाये. साक्षात्कार बोर्ड के सदस्यों का चयन सेल सीवीओ के माध्यम से रैंडम किया जाये. साक्षात्कार के दिन हीं साक्षात्कार बोर्ड में शामिल सदस्यों को पता चले कि किस विभाग के उम्मीदवारों का उनको साक्षात्कार लेना है. शैक्षणिक योग्यता, सर्विस काल अनुसार उम्मीदवारों को वरीयता दी जाये. वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट को भी पदोन्नति में आधार बनाया जाये.

बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ के महासचिव दिलीप कुमार ने कहा कि लिखित परीक्षा कम उम्र वालों को थोड़ा ठीक लगता है, लेकिन इस उम्र में सलेक्शन होता ही नहीं है. जब हम अपने सीनियरों की उम्र में जायेंगे, तो फिर लिखित परीक्षा में सेवा काल का नंबर जुड़ने पर ही फाइनल रूप से उत्तीर्ण होते हैं, उसमें भी साक्षात्कार का नंबर अच्छा मिले तब. तो इस लिखित परीक्षा और उसमें मिले अंकों का क्या रोल है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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