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Bokaro News : बेरमो के इस विद्यालय में डेढ़ दशक से बंद है माइनिंग सर्वेयर की पढ़ाई

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Bokaro News : बेरमो के इस विद्यालय में डेढ़ दशक से बंद है माइनिंग सर्वेयर की पढ़ाई

बेरमो स्थित राजकीयकृत रामबिलास प्लस टू इंटरमीडिएट रोजगारोन्मुखी विद्यालय में माइनिंग सर्वेयर की पढ़ाई डेढ़ दशक से बंद है. सत्र 2010-11 तक नियमित रूप से नामांकन जारी रहा. राज्य सरकार से सीसीएल द्वारा जारी 150 छात्रों के प्रशिक्षण आदेश का अनुमोदन नहीं दिये जाने से सत्र 2012 13 से नामांकन बंद है.

इस विद्यालय से माइनिंग सर्वेयर कोर्स की पढ़ाई पूरी करने वाले कई लोग कोल इंडिया की कंपनी इसीएल, बीसीसीएल, एसइसीएल, डब्ल्यूसीएल, एनसीएल, सीसीएल सहित बड़बील में नौकरी कर रहे हैं. बड़ी संख्या में लोग आउटसोर्सिंग कंपनियों, फोर लेन रोड के अलावा ओमान, अबु धाबी, दुबई, कतार आदि जगहों पर भी नौकरी कर रहे हैं. अब यहां माइनिंग सर्वेयर की पढ़ाई फिर शुरू होने के आसार कम दिख रहे हैं.

मालूम हो कि यहां वर्ष 1986 में व्यावसायिक शिक्षा की शुरुआत एकीकृत बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री सह इंटक नेता स्व बिंदेश्वरी दुबे ने करायी थी. नौ व्यावसायिक शिक्षा में सीसीएल की सहमति से अनुमति प्रदान की गयी. एकाउंटेंसी एंड ऑडिटिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, नर्सिंग एंड मिडवाइफरी, मेडिकल लैब तकनीशियन, ऑटो इंजीनियरिंग आदि ट्रेडों के सफलता को देखते हुए स्थानीय सीसीएल प्रबंधन के अनुरोध पर राज्य सरकार ने इस विद्यालय में माइनिंग सर्वेयर (शेष जगहों पर माइनिंग जियोलॉजी) कोर्स लागू किया. इसका सिलेबस विद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य ललित मोहन सिंह व शिक्षक शिवचंद्र सिंह ने बनाया था. माइनिंग सर्वेयर कोर्स शिक्षा विभाग की अधिसूचना संख्या 925 दिनांक 16 नवंबर 1986 द्वारा इस विद्यालय में वित्त रहित लागू हुआ. पूर्व में इस कोर्स में सीसीएल प्रबंधन मात्र 50-60 छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देता था.

शिक्षा विभाग में पत्राचार का भी असर नहीं

ग्रामीण क्षेत्रों से घिरे रामबिलास प्लस टू रोजगारोन्मुखी विद्यालय को व्यवसायिक शिक्षा से जोड़े जाने क पीछे स्थानीय युवाओं को स्वावलंबी बनाने व रोजगार दिलाना उद्देश्य था. लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर सरकार के उदासीन रवैया के कारण युवाओं का सपना टूटता चला गया़ विद्यालय स्तर से भी सीसीएल के पत्र को अनुमोदित करने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों के पास कई पत्राचार किया गया, परंतु स्थिति यथावत है. युवाओं का कहना है कि जब कोर्स के लिए अनुदेशक सहित वित्तीय सहायता भी सीसीएल प्रबंधन मुहैया कराता है तो सरकार सहयोग क्यों नहीं करती. कुछ वर्ष पूर्व सीसीएल बीएंडके क्षेत्रीय प्रबंधन ने इस दिशा में पहल करते हुए नामांकन के लिए फॉर्म वितरण की तिथि निर्धारित की थी, लेकिन बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया. इसको लेकर छात्रों ने जीएम कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन भी किया था.

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