Bokaro News : बंद पिछरी माइंस को चालू करने के लिए नहीं बनी टेरी रजिस्टर

Bokaro News : बंद पिछरी माइंस को फिर से चालू करने को लेकर टेरी रजिस्टर नहीं बनी है.

By JANAK SINGH CHOUDHARY | February 20, 2026 11:17 PM

सीसीएल ढोरी एरिया में वर्षों से बंद पिछरी माइंस को फिर से चालू करने के लिए एक साल पहले सीसीएल उच्च प्रबंधन ने जिला प्रशासन से मिल कर भूमि सत्यापन को लेकर टेरी रजिस्टर बनाने की बात कही थी. इसे बेसिक रजिस्टर मान कर जमीन का सत्यापन कार्य शुरू होना था. लेकिन टेरी रजिस्टर बनाने को लेकर अभी तक कोई प्रगति नहीं दिख रही है. मालूम हो कि इस माइंस को खोलने के लिए सीसीएल को वर्ष 2015 से 2018 तक तीन साल का इसी (इनवायरमेंटल क्लीयरेंस) मिला था, लेकिन समय सीमा के अंदर माइंस चालू नहीं हो पायी. अब नया इसी लेना होगा. इसके अलावा जमीन सत्यापन के बाद विस्थापितों को आरआर पॉलिसी के तहत नियोजन और मुआवजा देना होगा. दामोदर नदी से सटी इस माइंस में भविष्य में कोई समस्या नहीं हो, इसके लिए नदी किनारे बनाये गये बांध की साइंटिफिक स्टडी करायी जायेगी. इसके लिए सीसीएल की ओर से आइआइटी गुवाहाटी, आइआइटी सूरतकल तथा आइआइटी जयपुर से काफी पहले ब्यौरा मंगाया गया था.

मालूम हो कि बंद पिछरी खदान खोलने के लिए सरकार ने 458 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर सीसीएल को सौंपी थी. वर्ष 2015 में 344.7 एकड़ तथा 2018 में 79 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गयी. यहां 34 एकड़ जमीन कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के समय सीसीएल ढोरी एरिया को मिली थी. पूरी जमीन में 300 एकड़ रैयती तथा 133.2 एकड़ जमीन जीएमजेजे है, जो फोरेस्ट के ही दायरे में आती है.

खदान में है 19 मिलियन टन कोयला

प्रबंधन के अनुसार पिछरी माइंस में 19 मिलियन टन कोयला है. 16 वर्षों तक सालाना 1.5 मिलियन टन कोयला का उत्पादन किया जा सकता है. मालूम हो कि विस्थापित रैयतों और प्रबंधन के बीच चल रहा विवाद इस माइंस के खुलने में बाधक बना हुआ है. रैयतों की जमीन के सत्यापन के लिए डेढ़ दर्जन से ज्यादा बार गांव में कैंप लगाया गया. इसके अलावा पिछरी में प्रशासन द्वारा ग्राम सभा भी की गयी, एक प्रबंधकीय टीम भी बनायी थी. जमीन सत्यापन के लिए हायरिंग पर दो अमीन को प्रशासन के सहयोग से रखा गया. जमीन सत्यापन के लिए कागजात की तलाश के लिए प्रबंधन ने पटना के गुलजारबाग तथा हजारीबाग भी अपने अधिकारी को भेज कर पुराने खतियान को खंगाला गया. वर्ष 2018 में पिछरी के दुगराकुल्ली के 20 मकानों तथा जामटांड़ के 130 मकानों व जमीन की मापी क्षेत्रीय प्रबंधन ने शुरू करायी थी.