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Bokaro News : जंगल की आग को रोकने में बहुत हद तक कामयाब हुआ है बोकारो

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Bokaro News : जंगल की आग को रोकने में बहुत हद तक कामयाब हुआ है बोकारो

Bokaro News : सीपी सिंह, बोकारो. जंगल की आग को रोकने में बोकारो वन प्रमंडल को बहुत हद तक कामयाबी मिली है. कम-से-कम आंकड़ा तो यही बताता है. आआइएसएफआर 2023 की रिपोर्ट की मानें तो वित्तीय वर्ष 2022-23 व 2023-24 के बीच बोकारो में जंगल में अगलगी की घटना में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी आयी है. वित्तीय वर्ष 2022-23 में बोकारो जिला में जंगल की आग लगने की 458 घटना हुई थी, लेकिन 2023-24 में अगलगी की घटना कम होकर 242 हो गयी. निश्चित तौर पर यह बोकारो के लिए बड़ी उपलब्धि है.

राज्य में बोकारो का 10वां स्थान :

जंगल में अगलगी रोकने के मामले में बोकारो समेत झारखंड राज्य ने बेहतर काम किया है. वित्तीय वर्ष 2022-23 में झारखंड में 11,923 अगलगी की घटना हुई थी, जबकि 2023-24 में ऐसी घटना कम होकर 7,525 हो गयी. बोकारो का प्रदर्शन राज्य में 10वें स्थान पर है. सिमडेगा जिला का प्रदर्शन इस मामले में सबसे बेहतर है. सिमडेगा जिला में 2023-24 में जंगल में अगलगी की मात्र 27 घटना हुई, जबकि 2022-23 में 542 घटना हुई थी. राज्य में सबसे अधिक अगलगी की घटना पश्चिमी सिंहभूम में हुई है. 2023-24 में इस जिला में 1835 अगलगी की घटना हुई, जबकि 2022-23 में 2858 घटना हुई थी.

अभी से ही मुस्तैदी, ताकि इस साल और आये सुधार :

जंगल में आग रोकने को लेकर बीते दिन वन विभाग की अधिकारियों की बैठक प्रदेश में हुई थी. विभागीय जानकारों की मानें तो जंगल की आग को रोकने के लिए अभी से ही मुस्तैदी दिखायी जा रही है. अधिकारियों का मानना है कि जंगल में आग लगने का मुख्य कारण मानव निर्मित है. इसे रोका जा सकता है. आग लगने की घटना को चिह्नित कर रणनीति बनायी जायेगी. नुक्कड़ नाटक व पोस्टर-बैनर के जरिये लोगों को जागरूक किया जायेगा. जिला स्तर पर गठित आपदा प्रबंधन समिति के साथ भी बैठक कर रणनीति बनायी जायेगी.

महुआ गिरने से पहले ही हो जायेगी जंगल में झाड़ियों की सफाई : डीएफओ

डीएफओ रजनीश कुमार ने बताया : पिछले साल जंगल में आग रोकने के लिए चार टीम (क्वीक रिस्पांस टीम) बनायी गयी थी. यह टीम आग लगने वाले चिह्नित क्षेत्र के आसपास तैनात थी. इस साल पांच टीम बनायी जायेगी. छह सदस्यीय टीम में दो फायर ब्लोअर व चार स्प्रे मशीन की व्यवस्था होगी. लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. आग की सूचना मिलने के 20 मिनट के अंदर टीम उक्त स्थान पर पहुंच जायेगी. डीएफओ ने बताया : महुआ चुनने के लिए ग्रामीणों को नेट उपलब्ध कराया जायेगा. साथ ही सीजन आने के पहले ही झाड़ियों की सफाई कर दी जायेगी, ताकि महुआ चुनने को लेकर आग नहीं लगायी जाये. डीएफओ ने बताया : आग रोकने को लेकर एक बार बैठक हो चुकी है. अगले दो सप्ताह के अंदर बैठक कर रणनीति को अंतिम रूप दिया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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