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Home झारखण्ड बोकारो इस बार नहीं तपा नौतपा, झमाझम बारिश से बोकारो में निकल गई हवा! किसानों के लिए बुरा संकेत

इस बार नहीं तपा नौतपा, झमाझम बारिश से बोकारो में निकल गई हवा! किसानों के लिए बुरा संकेत

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इस बार नहीं तपा नौतपा, झमाझम बारिश से बोकारो में निकल गई हवा! किसानों के लिए बुरा संकेत
बारिश के बाद खेत में जमा पानी. फोटो: प्रभात खबर

बोकारो से सीपी सिंह की रिपोर्ट

Bokaro News: एक कहावत है, ‘तपै नवतपा नव दिन जोय, तौ पुन बरखा पूरन होय’. इसका अर्थ होता है कि यदि नौतपा के दौरान धरती पूरी तरह से तपती है, तो उस साल मानसून में बारिश उतनी ही अच्छी और पूर्ण होती है. बोकारो में नौतपा 25 मई से शुरू हुई. लेकिन, धरती को तपाने के बजाय मौसम ने करवट बदल लिया. 26 मई से पुरवइया बहने लगी. 27 मई को अधिकतम तापमान गिरकर 38 डिग्री सेल्सियस पहुंची. इसके बाद बादलों का आना-जाना शुरू हुआ, बारिश हुई. 28 को मौसम ठीक रहा, लेकिन, 29 मई यानी शनिवार को झमाझम बारिश हुई. आंधी-तूफान चला.

खेती के लिहाज से अच्छी नहीं है नौतपा में बारिश

नौतपा में बारिश को खेती के लिहाज से अच्छा नहीं माना जाता है. माना जाता है कि नौतपा की भीषण गर्मी फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया व कीड़ों को नष्ट कर देती है. यदि इस दौरान बारिश हो जाती है, तो वातावरण में उमस बढ़ जाती है. इससे फसलों में फफूंद व रोगों का खतरा बढ़ जाता है. सामान्य तौर पर इन नौ दिनों में किसान खेत की गहरी जुताई करके उन्हें तपाते हैं.

किसानों को सतर्कता बरतने की जरूरत: कृषि वैज्ञानिक

पेटरवार स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ रंजय कुमार सिंह की माने तो नौतपा में बारिश को वर्तमान स्वरूप में अवसर की तरह लिया जा सकता है. लेकिन, सतर्कता बरतने की जरूरत है. इस बारिश से मिट्टी में नमी आ गयी है. जबकि, आने वाले दिन में फिर से धूप की तपिश बढ़ेगी. ऐसे में किसान को खेत की गहरी जुताई कर लेनी चाहिए. साथ ही गोबर या कम्पोस्ट खाद खेत में डालना चाहिए. इससे जब बाद में तापमान बढ़ेगा तो मिट्टी में मौजूद कीड़ा स्वत: नष्ट हो जायेगा. इसका फायदा किसानों को मिलेगा.

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सब्जी उत्पादक किसान को सतर्क रहने की जरूरत

डॉ सिंह ने बताया कि सब्जी की खेती कर रहे किसानों को ध्यान देने की जरूरत है कि बारिश का पानी खेत में जमा नहीं हो. अगर खेत में पानी का जमाव होगा, तो फसल को गरमी वाली रोग हो सकती है. फसल को नुकसान पहुंचेगा. नौतपा में बारिश से खेतों में नमी आ जाती है, जिससे किसान तुरंत खरीफ फसलों (जैसे मक्का) की बुवाई कर सकते हैं. लेकिन, ध्यान नहीं देने की स्थिति में खरपतवार भी अधिक उगते हैं. खरपतवार उगने से फसल के विकास पर असर होता है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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