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Home झारखण्ड बोकारो Bokaro News : बेरमो में बंद हो रहे उद्योग-धंधे, बढ़ रहा रोजगार संकट

Bokaro News : बेरमो में बंद हो रहे उद्योग-धंधे, बढ़ रहा रोजगार संकट

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Bokaro News : बेरमो में बंद हो रहे उद्योग-धंधे, बढ़ रहा रोजगार संकट

राकेश वर्मा, बेरमो : झारखंड की औद्योगिक नगरी बेरमो कोयलांचल में हाल के कुछ वर्षों में कई उद्योग-धंधे बंद हुए और इससे रोजगार संकट बढ़ा है. सीसीएल की कई माइंसों व कोल वाशरियां सहित डीवीसी के बीटीपीएस व सीटीपीएस की कई इकाइयां बंद हुई हैं. कभी इस कोयलांचल में सीसीएल और डीवीसी कर्मियों की संख्या 50 हजार थी, जो अब 15-16 हजार रह गयी है. बेरमो कोयलांचल में डीवीसी के बीटीपीएस व सीटीपीएस के अलावा झारखंड सरकार का टीटीपीएस है. सीसीएल का तीन एरिया व तीन कोल वाशरी सहित एसआरयू भंडारीदह में ब्रिकेट बनाने का कारखाना व गोमिया में सबसे पुराना बारूद कारखाना है.

तीनों एरिया की सभी भूमिगत खदानें हुईं बंद

बेरमो कोयलांचल में सीसीएल के बीएंडके ,ढोरी व कथारा एरिया की सभी भूमिगत खदानें बंद हो गयी हैं. दो साल पहले स्वांग थर्ड डिग्री भूमिगत खदान को जिस समय बंद किया गया, उस समय यहां लगभग 425 मजदूर कार्यरत थे. इसके पहले वर्ष 2017 में ही कथारा कोलियरी की जारंगडीह भूमिगत खदान को भी बंद कर दिया गया. इस माइंस के बंद होने से करीब 400 मजदूर काम से बैठ गये. बीएंडके एरिया की बेरमो सीएम इंकलाइन (बीएसआइ) को भी सीसीएल बोर्ड ने बंद करने का निर्णय लेते हुए इसे बगल के ढोरी एरिया की अमलो परियोजना खुली खदान के साथ मर्ज कर दिया. बीएंडके एरिया की ही केएसपी फेज दो यूजी माइंस को वर्ष 2016 में बंद किया गया. जबकि डेढ़ दशक पूर्व कारो सीम इंकलाइन को बंद किया गया. खासमहल स्थित एक भूमिगत खदान भी वर्षों पूर्व बंद की जा चुकी है.

अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही कई खुली खदानें

सीसीएल के तीनों एरिया की कई खुली खदानें अपने अस्तित्व के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं. कई परियोजनाओं का विस्तार शिफ्टिंग समस्या के कारण अटका हुआ है. बीएंडके एरिया की करगली कोलियरी से एक दशक से कोयला का उत्पादन ठप है. इसी एरिया की ही नन-कोकिंग करगली वाशरी को बंद कर दिया गया है. बोकारो कोलियरी कई वर्षों से शिफ्टिंग समस्या का दंश झेल रही है.

खुलने का बाट जोह रही ये परियोजनाएं

सीसीएल की अति महत्वांकाक्षी परियोजना डीआरएंडआरडी चार दशक के बाद भी चालू नहीं हो सकी. आरएंडआरडी में करीब 214 मिलियन टन प्राइम कोकिंग कोयला का भंडार है. वर्ष 1982-83 में इस परियोजना की नींव पड़ी थी और उस वक्त परियोजना की लागत मात्र 50 करोड़ रुपये थी. प्रबंधकीय अदूरदर्शिता के कारण बाद में इस परियोजना की लागत बढ़ कर चार हजार करोड़ तक पहुंच गयी. वर्ष 1983 से 87 के बीच परियोजना से जुड़े 631 विस्थापितों को नौकरी भी दी गयी थी. इसमें से अधिकतर अब सेवानिवृत्ति के कगार पर पहुंच गये हैं. इसके अलावा ढोरी एरिया की बंद पिछरी व अंगवाली कोलियरी को खोलने के प्रबंधकीय प्रयास को अभी तक सफलता नहीं मिली है.

बंद हो गया ढोरी एरिया का सीएचपी

सीसीएल ढोरी एरिया का एसडीओसीएम परियोजना सीएचपी (कोल हैंडलिंग प्लांट) को प्रबंधन ने 23 मई 2017 से सर्वे ऑफ घोषित कर दिया. वर्ष 1985 में सीसीएल ढोरी एरिया के कल्याणी में इस सीएचपी की नींव रखी गयी थी. आइसीएस नामक कंपनी ने इसे बनाया था. वर्ष 1991 से यहां कोल क्रशिंग का काम शुरू हुआ था. इस प्लांट के बंद होने से 140 मजदूर बेरोजगार हो गये थे.

बंद हुआ सीपीपी, सैकड़ों मजदूर हुए बेकार

सीसीएल के कथारा एरिया में करोड़ों की लागत से बना कैप्टिव पावर प्लांट (सीपीपी) मार्च 2018 में बंद हो गया. इसके कारण सैकड़ों मजदूर बेरोजगार हो गये थे. इस प्लांट की दो यूनिट से 20 मेगावाट बिजली उत्पादन होता था. बीएचइएल कंपनी ने एक सौ करोड़ रुपये के लागत से इस प्लांट का निर्माण कर वर्ष 1995 में सीसीएल प्रबंधन को सौंपा था.

आठ साल से बंद है डीवीसी बेरमो माइंस

डीवीसी बेरमो माइंस से पिछले आठ साल से कोयला उत्पादन व ओबी रिमूवल का काम ठप है. एक मई 2018 को दिल्ली में मिनिस्ट्री ऑफ पावर तथा मिनिस्ट्री ऑफ कोल के वरीय अधिकारियों की बैठक में इस माइंस को सीसीएल में मर्ज करने पर अंतिम मुहर लगा दी गयी. लेकिन छह माह के बाद तत्कालीन उर्जा मंत्री आरके सिंह ने इस माइंस को डीवीसी द्वारा चलाये जाने की बात कही. लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ. बाद में सीसीएल ने इस माइंस को चलाने के लिए उद्घाटन भी किया, लेकिन उत्पादन कार्य शुरू नहीं हुआ.

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