फुसरो नगर परिषद का चुनाव परिणाम बहुत चौकाने वाला नहीं है. कांग्रेस व भाजपा के बीच मुख्य संघर्ष होगा, इसकी चर्चा थी. यह भी कयास लगाया जा रहा था कि दो-तीन हजार वोट ही जीत का अंतर होगा. कुछ लोग झामुमो की भी दमदार उपस्थिति की बात कह रहे थे, जो सच भी साबित हुआ. अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी निर्मला देवी और झामुमो समर्थित प्रत्याशी बीना कुमारी ने मिल कर 19704 मत बटोरे, जबकि कुल वोटों की संख्या 34612 है. यानि कांग्रेस व झामुमो ने मिल कर करीब 60 फीसदी मत बटोर लिये. सबसे बड़ी बात यह है कि गठबंधन में
दरार के बाद भी कांग्रेस ने अपने बलबूते पिछले चुनाव की कहानी दोहरा दी. पिछले चुनाव में
अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस प्रत्याशी की जीत हुई थी. इस बार के चुनाव मेंकांग्रेस समर्थित प्रत्याशी की जीत का सबसे बड़ा कारण यह था कि बेरमो विधायक व उनके पूरे परिवार ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था. वर्ष 2018 के चुनाव में
बेरमो विधायक ने घोषणा की थी कि अगर फुसरोनप के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस प्रत्याशी को नहीं जीता पाया तो बेरमो विस सीट से टिकट नहीं मांगूंगा. अंतत: उस चुनाव में
भी विधायक के पूरे परिवार ने अपनी ताकत झोंकी और चुनाव परिणाम उनके पक्ष मेंरहा. इस बार भी यही हुआ. इसके अलावा मुसलिम, बाहरी व लोकल वोटों के अलावा अन्य वर्ग से के वोटरों को भी कांग्रेस अपनी ओर आकर्षित करने में
कामयाब रही. कांग्रेस का बूथ मैनेजमेंट भी अच्छा रहा. दूसरी ओर भाजपा को भी सम्मानजनक 10277 वोट मिले. भाजपा का कहना है कि काफी संख्या मेंवोट का रिजेक्ट होना (करीब चार हार वोट रिजेक्ट हुए) ही उनकी हार का मुख्य कारण बना. भाजपा व कांग्रेस से इतर झामुमो का भी
नप चुनाव मेंवोट का प्रतिशत बढ़ा है और अब इस क्षेत्र में
वह एक नये राजनीतिक समीकरण की तलाश मेंहै.
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