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Home झारखण्ड बोकारो Bokaro News: आदिवासी भाषाएं विलुप्त होने के कगार पर, बचाने की जरूरत : गणेश चंद्र

Bokaro News: आदिवासी भाषाएं विलुप्त होने के कगार पर, बचाने की जरूरत : गणेश चंद्र

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Bokaro News: आदिवासी भाषाएं विलुप्त होने के कगार पर, बचाने की जरूरत : गणेश चंद्र

चंदनकियारी, चंदनकियारी के विभिन्न क्षेत्रों में रविवार को सेंगेल अभियान के नेतृत्व में आदिवासी समुदाय के लोगों ने हासा, भाषा विजय दिवस मनाया. सेंगेल अभियान के गणेश चंद्र हांसदा ने कहा अभियान की ओर से झारखंड सहित पूरे देश के आदिवासी बहुल प्रदेशों बिहार, बंगाल, असम, ओडिशा में हासा-भाषा विजय दिवस अर्थात मातृभूमि-मातृभाषा विजय दिवस मनाया जा रहा है. आज भारत देश और दुनिया की लगभग सभी आदिवासी भाषाएं विलुप्त होने के कगार पर खड़ी है, इसे बचाने की जरूरत है. कहा कि पूर्व सांसद सालखन मुर्मू के अथक प्रयास से 22 दिसंबर 2003 को भारत व दुनिया की एकमात्र बड़ी आदिवासी भाषा- संताली भाषा को भारत देश के लोकसभा में राष्ट्रीय मान्यता मिली. आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया. दुनियाभर के आदिवासियों के लिए एक महान भाषा सम्मान है. सेंगेल भारत राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मांग करती है कि 22 दिसंबर को राष्ट्रीय अवकाश और उत्सव दिवस के रूप में मनाया जाये. भारतीय इतिहास में दर्ज 1857 के सिपाही विद्रोह की जगह 1855 के संताल हूल को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का दर्जा प्रदान किया जाये. सिमोल टांड़ी विलेज सेंगेल टावर सोनी मुर्मू ने कहा कि आदिवासी गांव-समाज में अभी तक संविधान कानून और जनतंत्र लागू नहीं है. इस कारण आदिवासी गांव-समाज में वंशवादी स्वशासन व्यवस्था चालू है. ये थे मौजूद मौके पर सोमलाल हांसदा, नेपाल बेसरा, अनिता मुर्मू, उर्मिला मुर्मू, दीपिका हांसदा, शोभा बेसरा, बबिता मुर्मू, आरती किस्कू, लक्ष्मी मुर्मू, मोनिका सोरेन, सरासती हेंब्रम, काजोल सोरेन, लखी बेसरा, कुनामी बेसरा, परी सोरेन, सुनीता मुर्मू, सुखदेव सोरेन, राज बेसरा, जीतन मार्डी आदि उपस्थित थे.

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