Bokaro News : घट रही कोलकर्मियों की संख्या, पेंशन फंड हो रहा कमजोर

Bokaro News : कोल इंडिया के सेवानिवृत्त कर्मियों को जिस फंड से पेंशन दी जाती है, उसकी स्थिति फिलहाल ठीक नहीं है. इस फंड में अभी जितनी राशि सालाना आ रही है, उससे ज्यादा खर्च हो रहा है.

By Prabhat Khabar News Desk | January 17, 2025 11:33 PM

राकेश वर्मा, बेरमो : कोल इंडिया के सेवानिवृत्त कर्मियों को जिस फंड से पेंशन दी जाती है, उसकी स्थिति फिलहाल ठीक नहीं है. इस फंड में अभी जितनी राशि सालाना आ रही है, उससे ज्यादा खर्च हो रहा है. मजदूर संगठनों की माने तो वर्ष 2040 तक पेंशन में किसी तरह का रुकावट नहीं होगी. लेकिन पेंशन फंड को मजबूत करना होगा. इसको लेकर कोयला मंत्रालय, कोल इंडिया व कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफ) प्रबंधन मंथन कर रहा है. कहा जा रहा है कि अगर यही स्थिति रही तो वर्ष 2033-34 के बाद पेंशन फंड में संकट खड़ा हो सकता है. सीएमपीएफ में वित्तीय वर्ष 2022-23 के अंशदान के बाद वित्तीय वर्ष 2023-24 में तैयार रिपोर्ट के बाद यह स्थिति स्पष्ट हो पायी है. सीएमपीएफ में पेंशन फंड को मजबूत करने को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक आठ जनवरी को दिल्ली में हुई थी. इस बैठक में कोल इंडिया के निदेशक कार्मिक विनय रंजन तथा सीएमपीएफ आयुक्त बीके मिश्रा मुख्य रूप से उपस्थित थे. पेंशन फंड को मजबूत करने को लेकर चर्चा हुई. कहा गया कि पेंशन फंड के लिए कोल इंडिया प्रबंधन फिलहाल 10 रुपया प्रति टन कोयले पर अंशदान सीएमपीएफ को दे रहा है. चर्चा हुई कि यदि स्वैच्छिक योगदान प्रति टन कोयले पर 25 रुपये कर दिया जाये तो वर्ष 2037-38 तक पेंशन फंड मजबूत हो जायेगा. पेंशन फंड को और मजबूत करने के लिए अंशदान की राशि 35 से 40 रुपये प्रति टन करने पर भी विचार किया गया. सीएमपीएफ बोर्ड ऑफ ट्रस्टी में इस पर अंतिम निर्णय होगा. कोल इंडिया के डीपी विनय रंजन के अनुसार सीएमपीएफ में दस साल के बाद फंड की स्थिति नाजुक हो जायेगी. इसको लेकर गंभीरता से अध्ययन किया जा रहा है. कोल इंडिया से प्रति वर्ष करीब 12 हजार कर्मी सेवानिवृत्त हो रहे हैं. सीएमपीएफ आयुक्त के अनुसार कोयला मंत्रालय, कोल इंडिया एवं सीएमपीएफ प्रबंधन पेंशन फंड की मजबूती की दिशा में काम कर रहा है.

पेंशन फंड में जमा हैं 18 हजार करोड़ रुपये

कोल कर्मियों के वेतन से पीएफ मद में 12 फीसदी तथा पेंशन मद में सात फीसदी राशि काटी जाती है. जबकि कोल इंडिया (नियोक्ता) भी इतनी ही राशि देती है. मौजूदा समय में पेंशनरों की संख्या छह लाख 22 हजार हो गयी है. जबकि अंशदान करने वालों की संख्या घट कर तीन लाख 25 हजार रह गयी है. मालूम हो कि पहले अंशदान करने वालों की संख्या लगभग आठ लाख थी. रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा समय में पेंशन फंड में 18 हजार करोड़ रुपये जमा है. पेंशन फंड में हर साल जमा पूंजी से निकाल कर 300-400 करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है. एससीसीएल, टाटा, सेल सहित अन्य कंपनियों से लगभग पांच हजार कर्मी हर साल सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इस वजह से पेंशन भुगतान की राशि बढ़ रही है. अंशदान कम होने से पेंशन फंड पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.

सीएमपीएफ एक्ट में संशोधन के बाद बदलेगा स्वरूप

एटक नेता व जेबीसीसीआइ सदस्य लखनलाल महतो ने बताया कि सीएमपीएफ एक्ट 1948 में संशोधन की बात चल रही है. इपीएफ एक्ट 1952 में आया. फिलहाल पीएफ व पेंशन मद में कोल इंडिया (नियोक्ता) जितनी राशि दे रही है, निजी मालिक आने के बाद इतना देंगे, इस पर सवालिया निशान है. श्री महतो ने कहा कि फिलहाल नियम है कि 50 साल की उम्र में कोई भी कर्मी 50 फीसदी पीएफ राशि ले सकता है. लेकिन नये एक्ट में 40 फीसदी देने की बात है. इसके अलावा फैमिली के डेफिनेशन में भी संशोधन की बात चल रही है. जिन राज्यों में कोल ब्लॉक आवंटित किया जा रहा है, उन राज्यों को भी जोड़ना चाहती है. जानकारी के अनुसार मजदूर संगठनों ने मांगे गये सुझाव व विचार के बाद बहुत तरह के संशोधन भेजे हैं. एक्ट का ड्राफ्ट सर्कुलेट के बाद यूनियन ने सीएमपीएफ ऑर्गेनाइजेशन को अपनी प्रतिक्रिया दी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है