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Home झारखण्ड बोकारो पांच साल से गायब है बोकारो की सेजल, सात महीने से पुष्पा

पांच साल से गायब है बोकारो की सेजल, सात महीने से पुष्पा

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पांच साल से गायब है बोकारो की सेजल, सात महीने से पुष्पा
बोकारो के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र से गायब सेजल झा (बाएं) और पुष्पा कुमारी. फोटो: प्रभात खबर

बोकारो से रंजीत कुमार की रिपोर्ट

Bokaro Missing Girls: झारखंड के बोकारो जिले से लड़कियों के गायब होने का मामला सामने आया है. खबर है कि बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र से सेजल झा पिछले पांच साल से गायब है. वहीं, इसी थाना क्षेत्र के खुटाडीह गांव की पुष्पा कुमारी भी पिछले सात महीने से लापता है. हालांकि, सेजल झा के मामले में स्वयं संज्ञान लेते हुए सीआईडी ने उसकी तलाश करने की जिम्मेदारी ली है. वहीं, बोकारो पुलिस पुष्पा कुमारी को जल्द ही खोज निकालने का दावा कर रही है.

सेजल झा केस में सीआईडी की एंट्री

पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के गिरधरटांड गांव की रहने वाली सेजल झा 16 अक्तूबर 2020 को उस वक्त लापता हो गई थी, जब वह सुबह पौने ग्यारह बजे साइकिल से बगल के गांव कुरमा ट्यूशन पढ़ने निकली थी. महज 15 मिनट बाद मुख्य सड़क पर एक ट्रैक्टर चालक को सड़क किनारे साइकिल, चप्पल और किताबें गिरी हुई मिलीं. चालक ने सेजल के घर जाकर इसकी सूचना दी. जब परिजन मौके पर पहुंचे, तो वहां बिखरा सारा सामान सेजल का ही निकला. इसके बाद परिजनों ने पिंड्राजोरा थाना में सूचना दी और पुलिस जांच में जुट गई.

एसआईटी से लेकर कई एसपी बदले, नतीजा शून्य

घटना के एक सप्ताह के भीतर तत्कालीन एसपी चंदन झा ने एसआईटी का गठन किया. इसके बाद भी सेजल का कोई पता नहीं चल सका. मामला डीजीपी स्तर तक पहुंचा. अलग-अलग समय पर तत्कालीन एसपी प्रियदर्शी आलोक, पूज्य प्रकाश, मनोज स्वर्गियारी और वर्तमान एसपी हरविंदर सिंह की टीमों ने कई राज्यों में संभावित ठिकानों पर छापेमारी की. दर्जनों लोगों से पूछताछ हुई, लेकिन हर बार जांच बेनतीजा रही.

सेजल के आने का परिजनों को इंतजार

सेजल की मां उषा झा और पिता राम कृष्ण झा पिछले पांच सालों से न्याय और अपनी बेटी की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लेकर सांसद, विधायक और राज्य के लगभग हर बड़े अधिकारी तक गुहार लगाई गई, लेकिन हर जगह सिर्फ आश्वासन ही मिले. परिजन स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग करते रहे. मां उषा झा का कहना है कि हर दिन इस उम्मीद में मोबाइल ऑन रखती हूं कि शायद कहीं से सेजल की कोई खबर आ जाए. अब अदालत और सीआइडी जांच ही आखिरी आस बची है.

सीआईडी जांच से जगी नई उम्मीद

सेजल के मामले में बोकारो के वर्तमान एसपी हरविंदर सिंह का कहना है कि मुख्यालय से सेजल झा केस को रिकॉल किया गया है और परिजनों की संतुष्टि के लिए सीआईडी जांच कराई जा रही है. सीआईडी टीम ने पिंड्राजोरा थाना से केस से जुड़े सभी रिकॉर्ड और पिछले वर्षों में हुई जांच की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है, ताकि जांच को नई दिशा मिल सके.

पुष्पा कुमारी मामले में भी अनिश्चितता बरकरार

पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र की सरदाहा पंचायत के खुटाडीह गांव की रहने वाली 18 वर्षीय पुष्पा कुमारी 21 जुलाई 2025 को कॉलेज जाने के लिए घर से निकली थी. उसने पड़ोसी से साइकिल ली थी, लेकिन देर शाम तक वह घर नहीं लौटी. खोजबीन के दौरान उसकी साइकिल बेडानी मोड़ पर मिली. अनहोनी की आशंका को लेकर परिजन तुरंत थाना पहुंचे और मामला दर्ज कराया. सात महीने बीत जाने के बावजूद पुष्पा का कोई सुराग नहीं मिल पाया है.

पुष्पा के परिजनों को गांव के आदमी पर शक

पुष्पा की मां रेखा देवी ने थाने में दिए आवेदन में गांव के ही दिनेश कुमार महतो पर संदेह जताया. पुलिस ने कई बार दिनेश से पूछताछ की, लेकिन कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया. पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि दुर्गापुर गांव के एक युवक से पुष्पा की दोस्ती थी. इस एंगल से भी जांच की जा रही है. पुष्पा के पिता अनंत महतो मजदूरी के सिलसिले में झारखंड से बाहर रहते थे. सूचना मिलते ही वे वापस लौट आए और एसपी से लेकर डीसी तक गुहार लगाई.

थाने का चक्कर लगा रहे परिजन

पुष्पा की बरामदगी को लेकर माता-पिता रोज पिंड्राजोरा थाना का चक्कर लगा रहे हैं. बोकारो एसपी हरविंदर सिंह ने कहा कि सभी संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा चुके हैं और टेक्निकल सेल को भी जांच में लगाया गया है. इसके बावजूद अब तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आ सकी है.

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बोकारो में लड़कियां असुरक्षित

सेजल और पुष्पा के मामलों ने बोकारो जिले में बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते सेजल केस का खुलासा हो गया होता, तो शायद पुष्पा के मामले में इतनी अनिश्चितता नहीं होती. समाजसेवी विजेता शेखर ने डीजीपी को चिट्ठी लिखकर दोनों मामलों में सीआईडी जांच और पुलिस को स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की मांग की है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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