Bokaro News : वन संरक्षण में समितियों की भूमिका को बताया अहम

Bokaro News : वन संरक्षण में समितियों की भूमिका की सराहना की गयी.

By JANAK SINGH CHOUDHARY | June 10, 2026 11:37 PM

झारखंड में वन सुरक्षा समितियों को वनोपज की आय का 90 प्रतिशत हिस्सा दिलाने, मानव-हाथी संघर्ष को कम करने और वन संरक्षण अभियान को नयी गति देने की दिशा में वन विभाग गंभीरता से काम कर रहा है. यह बातें राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) संजीव कुमार ने बुधवार को पेटरवार में प्रभात खबर से विशेष बातचीत में कही. उन्होंने कहा कि जहां-जहां वनोपज संग्रहण एवं विपणन की गतिविधियां चल रही हैं, वहां विस्तृत माइक्रो प्लान तैयार किया जायेगा. इसके आधार पर कार्ययोजना बना कर सरकार को भेजी जायेगी. सरकारी संकल्प के अनुसार समितियों को मिलने वाली राशि को वन विकास, गांवों के विकास और समिति के सुदृढ़ीकरण पर खर्च करना है. वन सुरक्षा समितियों को उनका हक मिलेगा.

एआइ तकनीक से हाथियों पर रखी जायेगी नजर

राज्य में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष पर चिंता व्यक्त करते हुए पीसीसीएफ ने कहा कि विभाग ने उन क्षेत्रों की पहचान कर ली है, जहां हाथियों का नियमित आवागमन होता है. ऐसे सभी एलिफेंट कॉरिडोर में हाथियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है. अक्सर भोजन और पानी की तलाश में हाथी गांवों की ओर रुख करते हैं, जिससे संघर्ष की स्थिति पैदा होती है. यदि जंगलों में ही उनकी जरूरतें पूरी हो जाये, तो इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है. साथ ही विभाग आधुनिक तकनीक का भी सहारा ले रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे हाथियों की गतिविधियों की निगरानी होगी और उनके गांवों की ओर बढ़ने की सूचना पहले ही ग्रामीणों तक पहुंचायी जा सकेगी. इससे लोगों को सतर्क रहने और नुकसान से बचने का अवसर मिलेगा.

हर क्षेत्र में बनेंगे हाथी भगाओ दल

संजीव कुमार ने कहा कि हर क्षेत्र में हाथी भगाओ दल का गठन किया जायेगा. प्रत्येक दल में कम से कम छह सदस्य होंगे, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराये जायेंगे. इससे बाहरी जिलों से दल को बुलाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और त्वरित कार्रवाई संभव होगी.

झारखंड में बढ़ा है वन क्षेत्र

वनों की स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड के गठन के बाद वन क्षेत्र में लगातार वृद्धि हुई है. वर्ष 2001 और 2023 के आंकड़ों की तुलना करने पर राज्य में एक लाख हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र बढ़ा है. उम्मीद है कि विभाग के निरंतर प्रयासों से आने वाले वर्षों में भी यह वृद्धि जारी रहेगी. झारखंड में वन संरक्षण की सफलता के पीछे ग्राम स्तर पर गठित वन सुरक्षा समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. विशेषकर, कसमार और पेटरवार समेत उत्तरी छोटानागपुर में पिछले साढ़े तीन दशकों से समितियों ने उल्लेखनीय कार्य किया है. साथ ही आम लोगों में पर्यावरण और वन संरक्षण को लेकर बढ़ती जागरूकता को भी उन्होंने सकारात्मक संकेत बताया. उन्होंने कहा कि वन विभाग और ग्रामीण समुदाय के संयुक्त प्रयासों से ही झारखंड के जंगलों का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध बनाया जा सकता है.