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आधार कार्ड में बार-बार नहीं बदल सकेंगे जन्मतिथि, नियम हुआ सख्त

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आधार कार्ड में बार-बार नहीं बदल सकेंगे जन्मतिथि, नियम हुआ सख्त
आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलने का नियम सख्त हुआ.

Aadhaar Card Rules Change: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने आधार कार्ड में जन्मतिथि बार-बार बदलने की प्रक्रिया पर सख्ती कर दी है. अब कम उम्र दिखाने या अन्य लाभ लेने के उद्देश्य से जन्मतिथि में हेरफेर करना आसान नहीं होगा. नए नियमों के तहत बिना ठोस दस्तावेज और पंजीकरण सत्यापन के बदलाव संभव नहीं होगा.

क्यों बढ़ी थी गड़बड़ी की शिकायतें

पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया कि कई लोग जरूरत के अनुसार नया जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर आधार में जन्मतिथि बदलवा लेते थे. कम उम्र दिखाकर नौकरी, परीक्षा या अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की कोशिश की जाती थी. रांची स्थित आधार सेवा केंद्र में रोजाना बड़ी संख्या में लोग जन्मतिथि सुधार के लिए पहुंचते रहे हैं. झारखंड के साथ-साथ बिहार और पश्चिम बंगाल से भी आवेदक यहां आते रहे हैं.

अब क्या बदला है नियम में

नए प्रावधान के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर सुधार कराना चाहता है तो जन्म पंजीकरण संख्या का सत्यापन अनिवार्य होगा. केवल नया जन्म प्रमाण पत्र दिखाने से काम नहीं चलेगा. संबंधित पंजीकरण संख्या में वैध सुधार दर्ज होना जरूरी है.

प्रक्रिया कर दी गई कड़ी

पहले पुराने जन्म प्रमाण पत्र को रद्द कराने की जानकारी लेकर नया प्रमाण पत्र स्वीकार किया जाता था. लेकिन अब प्रक्रिया और कड़ी कर दी गई है, ताकि एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार जन्मतिथि बदलने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके.

आधार सेवा केंद्रों पर बढ़ी निगरानी

रांची के आधार सेवा केंद्र में जन्मतिथि सुधार को लेकर हर दिन लंबी कतारें देखी जाती हैं. अब अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि संदिग्ध मामलों की गहन जांच की जाए. दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन और पंजीकरण डेटा का मिलान अनिवार्य किया गया है.

किन्हें मिलेगी राहत

जिन लोगों की जन्मतिथि में वास्तविक त्रुटि है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधार की सुविधा मिलती रहेगी. लेकिन मनमाने ढंग से बार-बार बदलाव कराने वालों के लिए रास्ता बंद हो गया है.

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क्या रखें ध्यान

आधार में जन्मतिथि सुधार के लिए सही और प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करना जरूरी है. जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज पंजीकरण संख्या सही होनी चाहिए और उसमें किसी प्रकार का फर्जी संशोधन नहीं होना चाहिए. सरकार का उद्देश्य आधार डेटा की विश्वसनीयता बनाए रखना और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है. नए नियमों से पारदर्शिता बढ़ेगी और आधार प्रणाली की साख मजबूत होगी.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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