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Home Rajya दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव : शाहदरा में कांग्रेस, बीजेपी और आप तीनों की प्रतिष्ठा दांव पर, मुकाबला दिलचस्प

दिल्ली विधानसभा चुनाव : शाहदरा में कांग्रेस, बीजेपी और आप तीनों की प्रतिष्ठा दांव पर, मुकाबला दिलचस्प

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दिल्ली विधानसभा चुनाव : शाहदरा में कांग्रेस, बीजेपी और आप तीनों की प्रतिष्ठा दांव पर, मुकाबला  दिलचस्प
शाहदरा विधानसभा सीट
  • दिल्ली में 5 फरवरी को मतदान
  • 8 फरवरी को होगी मतों की गिनती

Shahdara Assembly constituency : दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान पांच फरवरी को होना है और परिणाम 8 फरवरी को जारी होंगे. इस चुनाव में शाहदरा विधानसभा सीट का मुकाबला काफी रोचक होता दिख रहा है. शाहदरा विधानसभा सीट पर पिछले दो चुनाव से आम आदमी पार्टी का कब्जा है और राम निवास गोयल यहां से विधायक चुने गए थे हैं. इस चुनाव में आप ने जितेंद्र सिंह शंटी को चुनावी मैदान में उतारा है.

क्या है शाहदरा विधानसभा सीट का इतिहास

शाहदरा विधानसभा सीट पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट का हिस्सा है. शाहदरा के इतिहास पर अगर गौर करें तो पाएंगे कि इस सीट पर किसी भी पार्टी का दबदबा रहा हो, ऐसा नहीं है. इस सीट के मतदाताओं ने कांग्रेस, अकाली दल, बीजेपी और आप सबके उम्मीदवारों को बारी-बारी से अपना विधायक चुना है. 1993 में यहां के विधायक बीजेपी के राम निवास गोयल थे. 1998, 2003 और 2008 में यहां से कांग्रेस नेता नरेंद्र नाथ विधायक चुने गए. 2013 में BJP के जितेंद्र सिंह शंटी यहां से विधायक बने. 2015 में आप ने इस सीट पर जीत दर्ज की और बीजेपी से आप में आए राम निवास गोयल यहां से 2015 और 2020 में विधायक चुने गए.

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रोचक होगा 2025 का मुकाबला

2025 के विधानसभा चुनाव में शाहदरा विधानभा सीट पर मुकाबला रोचक होने वाला है. एक ओर जहां आम आदमी पार्टी इस सीट को तीसरी बार जीतने की कोशिश करेगी, वहीं बीजेपी भी यह कोशिश करेगी कि जनता उसका साथ थे. शाहदरा वैश्य बहुल क्षेत्र है इसलिए 1998 के चुनाव में बीजेपी के राम निवास गोयल ने यहां से बड़ी जीत दर्ज की थी. लेकिन 1998 में बीजेपी ने राम निवास गोयल का टिकट काट दिया और पार्टी चुनाव हार गई, तब से अबतक शाहदरा से बीजेपी को जीत हासिल नहीं हुई है. 2013 में राम निवास गोयल आप के साथ चले गए और दो बार पार्टी के लिए जीत भी दर्ज की, लेकिन अब वे राजनीति को अलविदा कह चुके हैं, इसलिए आम आदमी पार्टी ने जितेंद्र सिंह शंटी को अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं कांग्रेस की कोशिश भी यह रहेगी कि वह उस सीट को दोबारा अपने कब्जे में ले, जिसपर तीन चुनाव में उनके नेता नरेंद्र नाथ जीत हासिल कर चुके थे. यानी कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि मुकाबला काफी दिलचस्प होगा.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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