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Home Rajya दिल्ली Delhi Assembly Election 2025 : प्याज की कीमत ने बढ़ाई बीजेपी की टेंशन, 52 दिन में सुषमा स्वराज भी नहीं बदल सकीं चुनावी फिजा

Delhi Assembly Election 2025 : प्याज की कीमत ने बढ़ाई बीजेपी की टेंशन, 52 दिन में सुषमा स्वराज भी नहीं बदल सकीं चुनावी फिजा

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Delhi Assembly Election 2025 : प्याज की कीमत ने बढ़ाई बीजेपी की टेंशन, 52 दिन में सुषमा स्वराज भी नहीं बदल सकीं चुनावी फिजा
सुषमा स्वराज

Delhi Assembly Election 2025 : दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए 5 फरवरी को वोट डाले जाएंगे. इसके बाद 8 फरवरी को चुनाव के नतीजे आएंगे. इससे पहले हम आपको चुनाव के इतिहास की बात बताते हैं, जब सुषमा स्वराज 52 दिन के लिए दिल्ली की सीएम बनीं. नतीजे आए तो कांग्रेस ने बीजेपी से सत्ता छीन ली. दरअसल, 1993 में दिल्ली में पूर्ण विधानसभा की व्यवस्था की गई. इसके बाद से अब तक दिल्ली में 6 मुख्यमंत्री हो चुके हैं. संविधान संशोधन के जरिए दिल्ली में जब पहली बार 1993 में विधानसभा चुनाव करवाए गए तो बीजेपी को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ. मदन लाल खुराना मुख्यमंत्री बनाए गए, लेकिन खुराना का कार्यकाल (2 दिसंबर 1993 से 26 फरवरी 1996) लगातार उतार-चढ़ाव भरा नजर आया. अंत में उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ गया.

प्याज की कीमत ने बढ़ा दी बीजेपी की टेंशन

खुराना के बाद बीजेपी ने जाट नेता साहिब सिंह वर्मा को दिल्ली का सीएम बनाया. वह भी अपना कार्यकाल (26 फरवरी 1996 से 12 अक्टूबर 1998) पूरा नहीं कर सके. चुनाव से पहले पार्टी को लेकर बनी नकारात्मक छवि और देश में प्याज की लगातार बढ़ती कीमतों ने बीजेपी को परेशान कर दिया. पार्टी ने फिर से एक बार अपना सीएम बदलने का फैसला लिया. बीजेपी ने चुनाव में उतरने से पहले सुषमा स्वराज को कमान सौंपी. वह तेजतर्रार छवि वाली नेता थी. सुषमा स्वराज ने बीजेपी सरकार की छवि सुधारने की काफी कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. वह केवल 52 दिन ही मुख्यमंत्री रह सकीं.

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बहुत कम वक्त मिला सुषमा स्वराज को

सुषमा स्वराज के मुख्यमंत्री बनने के वक्त दिल्ली विधानसभा का पहला कार्यकाल अपने अंतिम पड़ाव की ओर था. उनके पास 2 महीने से भी कम का समय बचा था. इसमें उन्हें कई काम करने थे. दिल्ली में चुनावी फिजा अपने चरम पर थी. इसका परिणाम यह हुआ कि बीजेपी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस दिल्ली की सत्ता पर कब्जा करने में सफल रही. पार्टी ने शीला दीक्षित को सीएम बनाया.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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