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Home Rajya दिल्ली बदरपुर विधानसभा क्षेत्र पर नहीं है किसी पार्टी का दबदबा, दलबदलुओं ने किया है राज

बदरपुर विधानसभा क्षेत्र पर नहीं है किसी पार्टी का दबदबा, दलबदलुओं ने किया है राज

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बदरपुर विधानसभा क्षेत्र पर नहीं है किसी पार्टी का दबदबा, दलबदलुओं ने किया है राज
नारायण दत्त शर्मा

  • दिल्ली में 5 फरवरी को मतदान
  • 8 फरवरी को होगी मतों की गिनती

Badarpur Assembly Constituency : बदरपुर विधानसभा क्षेत्र 2008 में अस्तित्व में आया है. यह विधानसभा क्षेत्र दक्षिण दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में आने वाले 10 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. बदरपुर दिल्ली के दक्षिण-पूर्वी इलाके में स्थित है और यह एनटीपीसी के थर्मल पावर स्टेशन और बदरपुर गांव के लिए जाना जाता है. 2020 के विधानसभा चुनाव में यहां से बीजेपी के रामवीर सिंह बिधूड़ी विधायक चुने गए थे, उन्होंने आम आदमी पार्टी ने नेता राम सिंह नेताजी को पराजित किया था.

बदरपुर विधानसभा क्षेत्र का इतिहास


बदरपुर विधानसभा क्षेत्र के इतिहास पर नजर डालें तो यह कहा जा सकता है कि इस सीट पर कभी भी किसी खास पार्टी का दबदबा नहीं रहा है. दिल्ली में जब 1993 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए तो जनता दल की टिकट पर रामवीर सिंह बिधूड़ी चुनाव जीते थे. उसके बाद रामसिंह नेताजी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में 1998 में चुनाव जीते. 2003 में रामवीर सिंह बिधूड़ी ने राकांपा की टिकट पर चुनाव जीता.परिसीमन के बाद जब 2008 में चुनाव हुए तो बीएसपी के नेता के रूप में रामसिंह नेताजी यहां से विजयी हुए. 2013 के चुनाव में रामवीर सिंह बिधूड़ी बीजेपी में शामिल हो गए और उन्होंने यहां से जीत दर्ज की. 2015 में आम आदमी पार्टी की टिकट पर नारायण दत्त शर्मा विजयी हुए और 2020 में एक बार फिर रामवीर सिंह बिधूड़ी बीजेपी के चुनाव पर जीते.

एक बार फिर दलबदलुओं के बीच मुकाबला


बदरपुर से विधायक रहे बीजेपी नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी अब सांसद हो गए है. इस बार बीजेपी ने आम आदमी पार्टी और बीएसपी छोड़कर बीजेपी में आने वाले नारायण दत्त शर्मा को टिकट दी है.आम आदमी पार्टी ने राम सिंह नेताजी को टिकट दिया और दांव खेला है. कांग्रेस की ओर से अभी उम्मीदवार की घोषणा नहीं हुई है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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