[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Religion Mahashivratri 2023: बिहार के इस मंदिर में एक साथ होती है शिव-विष्णु की पूजा, जानें बाबा हरिहरनाथ का रहस्य

Mahashivratri 2023: बिहार के इस मंदिर में एक साथ होती है शिव-विष्णु की पूजा, जानें बाबा हरिहरनाथ का रहस्य

0
Mahashivratri 2023: बिहार के इस मंदिर में एक साथ होती है शिव-विष्णु की पूजा, जानें बाबा हरिहरनाथ का रहस्य

महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है. इस साल महा शिवरात्रि पर विशेष संयोग बन रहा है. इस दिन शनिदेव की राशि मकर में शनि, बुध, मंगल, शुक्र और चंद्रमा विराजमान रहेंगे. इस दिन हरिहरनाथ मंदिर में स्थापित महादेव की पूजा करने पर आपके मन की सारी मुरादे पूरी हो जाती है. हरिहरनाथ मंदिर बिहार के हाजीपुर से पांच किलोमीटर की दूरी पर सोनपुर में गंडक नदी के किनारे स्थित है.

एक ही गर्भगृह में विराजमान है शिव और हरि

बाबा हरिहरनाथ शिवलिंग विश्व का एकमात्र ऐसा शिवालय है, जिसके आधे भाग में शिव (हर) और शेष भाग में विष्णु (हरि) की प्रतिमा है. एक ही गर्भगृह में दोनों देव विराजमान है, इसलिए हरिहर के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वयं ब्रह्मा ने शैव और वैष्णव संप्रदाय को एक-दूसरे के नजदीक लाने के लिए की थी. कथा के अनुसार भगवान रामचंद्र ने गुरु विश्वामित्र के साथ जब जनकपुर जा रहे थे इसी दौरान यहां रुक कर हरि और हर की स्थापना की थी. इस मंदिर में पूजा अर्चना के बाद सीता स्वयंवर में शिव के धनुष को तोड़कर सीता जी का वरन किया था.

यहां पर हुआ था हाथी-मगरमच्छ की लड़ाई

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इंद्रद्युम्न नामक एक राजा, अगस्त्य मुनि के श्राप से हाथी बन गए थे और हुहु नामक गंधर्व देवल मुनि के श्राप से मगरमच्छ. कालांतरण में गज (हाथी) और मगरमच्छ के बीच सोनपुर में गंगा और गंडक के संगम पर युद्ध हुआ था. इसी के पास कोनहराघाट में पौराणिक कथा के अनुसार गज और ग्राह (मगरमच्छ) का वर्षों चलने वाला युद्ध हुआ था. बाद में भगवान विष्णु की सहायता से गज की विजय हुई. हरिहरनाथ मंदिर इमारती लकड़ियों और काले पत्थरों के कलात्मक शिला खंडों से बना था.

यहां ऋषियों और साधुओं का हुआ था विशाल सम्मेलन

इनपर हरि और हर के चित्र और स्तुतियां उकेरी गई थीं. उस दरम्यान इस मंदिर का पुनर्निर्माण मीर कासिम के नायब सूबेदार राजा रामनारायण सिंह ने कराया था. वह नयागांव, सारण (बिहार) के रहने वाले थे. कहा जाता है कि पाप पर विजय हुआ था. इस मंदिर को हरिहरनाथ के नाम से जाना जाता है़ वहीं, कुछ लोगों के अनुसार प्राचीन काल में यहां ऋषियों और साधुओं का एक विशाल सम्मेलन हुआ था. शैव और वैष्णव के बीच गंभीर वाद विवाद खड़ा हो गया. बाद में दोनों में सुलह हो गई और शिव तथा विष्णु दोनों की मूर्तियों की एक ही मंदिर में स्थापना की गई, उसी को स्मृति में यहां कार्तिक में पूर्णिमा के अवसर पर मेला आयोजित किया जाता है.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel