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UP Politics: लोकसभा चुनाव से पहले क्यों चर्चा में है ‘फूलपुर’, जदयू ने नीतीश के लिए क्यों चुना यह सीट

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UP Politics: लोकसभा चुनाव से पहले क्यों चर्चा में है ‘फूलपुर’, जदयू ने नीतीश के लिए क्यों चुना यह सीट

UP Politics लोकसभा चुनाव से पहले यूपी का फूलपुर (Phoolpur) लोकसभा क्षेत्र चर्चा में है. देश के दो पूर्व पीएम की कर्म भूमि रही फूलपुर (Phoolpur) इस दफा बिहार में सियासी हलचलें बढ़ा दी है. दरअसल, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने दो दिन पहले कहा था कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार यूपी के फुलपुर से चुनाव लड़ सकते हैं. उनसे यह संकेत मिलते ही बिहार में सियासी हलचलें तेज हो गई. बीजेपी नेता सुशील मोदी ने तो नीतीश कुमार को ओपन चैलेंज देते हुए कहा कि नीतीश जी चाहे फूलपुर जाएं या मिर्जापुर,आपकी जमानत तक नहीं बचेगी.

फूलपुर से क्या है नीतीश का कनेक्शन

बिहार के सीएम नीतीश कुमार आखिर बिहार छोड़कर यूपी से क्यों चुनाव लड़ना चाह रहे हैं. इसपर उनके समर्थकों का कहना है कि पीएम की कुर्सी यूपी होकर जाती है. इसलिए नीतीश कुमार ने भी यूपी से चुनाव लड़ने का मन बनाया है. इसके साथ ही यूपी में 80 लोकसभा की सीटें हैं,जोकि पूरे देश में सबसे ज्यादा हैं.इसलिए पीएम पद के उम्मीदवारों की पहली पसंद यूपी से ही चुनाव लड़ना होता है.यहां से हिंदी पट्टी साधने की कोशिश की जाती है. जाति को लेकर अगर बात करें तो फूलपुर एक कुर्मी बाहुल्य सीट है. यहां पर करीब तीन लाख कुर्मी वोटर हैं.खुद नीतीश कुमार कुर्मी समाज से आते हैं. इस सीट से आठ सांसद कुर्मी समाज से चुने गए हैं.इस सीट पर बीजेपी की स्थिति कमजोर मानी जाती है. अब तक सिर्फ दो बार चुनाव ही बीजेपी जीत पाई है.साथ ही फूलपुर बिहार के काफी करीब है, इसलिए यहां से पूर्वांचल के साथ-साथ बिहार को साधा जा सकता है.

मोदी के ‘कौन’का नीतीश यहां से देंगे जवाब

फूलपुर संसदीय क्षेत्र पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से नजदीक है. कहा जा रहा है नीतीश कुमार यहां से पीएम नरेंद्र मोदी के समर्थक की ओर से बार बार किए जा रहे मोदी नहीं तो कौन? का भी नीतीश कुमार जवाब देंगे और पीएम नरेंद्र मोदी को सीधी चुनौती देते नजर आएंगे. चुनाव में जनता के बीच दोनों नेताओं के आमने-सामने होने जैसा आभास होता रहेगा.

फूलपुर क्यों है खास?

फूलपुर सीट पूर्वांचल में पड़ता है. जोकि बिहार के करीब है और ये एक कुर्मी बहुल क्षेत्र है. फूलपुर ने देश को दो प्रधानमंत्री दे चुका. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इसी सीट से सांसद रहे,वे लगातार तीन बार सांसद रहे और देश के पीएम चुने गए.1964 में उनके निधन के बाद उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित इस सीट से चुनाव लड़ी और वो जीती. 1967 में समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र ने उनके खिलाफ चुनाव लड़ा लेकिन वे चुनाव हार गए. इस सीट पर फिर से जनता ने विजय लक्ष्मी पंडित को ही चुना. 1971 में विश्वनाथ प्रताप सिंह भी फूलपुर सीट से सांसद लोकसभा पहुंचे और आगे चलकर वे देश के प्रधानमंत्री बने.वहीं डॉ.राम मनोहर लोहिया का नाम भी इस सीट से जुड़ा है.

खास बात ये है कि 1962 में राम मनोहर लोहिया,जवाहर लाल नेहरू के खिलाफ चुनाव लड़े थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.यहां से यूपी के सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा की पत्नी कमला बहुगुणा सांसद बनीं.यहां से दो बाहुबली भी संसद पहुंच चुके हैं.बाहुबली नेता अतीक अहमद 2004 में और 2009 में कपिल मुनि करवरिया यहां से सांसद रहे.यूपी बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और डिप्टी केशव प्रसाद मौर्य 2014 में यहां से लोकसभा पहुंच चुके हैं.

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