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Home बिहार सुपौल अस्पताल ने नहीं दिया शव तो परिजनों ने संपन्न करा लिया श्राद्ध कर्म

अस्पताल ने नहीं दिया शव तो परिजनों ने संपन्न करा लिया श्राद्ध कर्म

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अस्पताल ने नहीं दिया शव तो परिजनों ने संपन्न करा लिया श्राद्ध कर्म

– नेपाल के न्यूरो कार्डियो एंड मल्टी स्पेशलिस्ट हास्पिटल में 19 दिन से रखा है शव प्रबंधन के लिए बना है गले की हड्डी जदिया सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से जख्मी हुए युवक की इलाज के दौरान हुई मौत के बाद उसका शव अस्पताल प्रबंधन के लिए गले की हड्डी बन गया है. शव पिछले 19 दिनों से अस्पताल के फ्रीजर में पड़ा हुआ है. दरअसल मामला सड़क दुघर्टना में गंभीर रूप से जख्मी हुए युवक की है. पिछले 15 अक्टूबर को जदिया थाना से महज 200 गज की दूरी पर बाइक पर सवार दो सगे भाई कोरियापट्टी पश्चिम पंचायत के वार्ड 13 निवासी सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप जख्मी हो गए थे. गंभीर अवस्था में दोनों का प्राथमिक उपचार के बाद अमरेन्द्र पासवान को मधेपुरा मेडिकल कॉलेज अस्पताल और दूसरे जख्मी सुभाष उर्फ रोशन को पड़ोसी देश नेपाल के न्यूरो कार्डियो एंड मल्टी स्पेशलिस्ट हास्पिटल में भर्ती कराया गया था. जहां सुभाष की इलाज के दौरान उसकी पिछले 24 अक्टूबर को अस्पताल में मौत हो गई थी. बाद में अस्पताल का इलाज के दौरान तकरीबन चार लाख नेपाली करेंसी का बिल देख कर परिजन शव को वहीं छोड़ कर घर पहुंच गये. बताया जाता है कि बाद में परिजन कुछ लोगों के साथ वहां पहुंचे. जहां गरीबी से तंग हाल का ब्यौरा देकर शव देने की गुजारिश की थी. लेकिन मामला अटक गया. उसके बाद से अस्पताल प्रबंधन के लिए मृतक का शव गले की हड्डी बन गया है. दो देशों के बीच हुए इस घटना क्रम एवं परिजनों के बेरुखी के बाद अस्पताल प्रबंधन ने इलाज की कुल बकाया राशि को माफी करते हुए परिजनों से मिन्नत कर रहे हैं. लेकिन परिजनों के टाल मटोल से अस्पताल प्रबंधन के लिए यह मामला गले में हड्डी की तरह अटका पड़ा है. मालूम हो कि उक्त गांव के झमेली पासवान के दो पुत्र बाइक से दुर्घटना ग्रस्त हुए थे. परिजनों संपन्न करा लिया श्राद्धकर्म मृतक के पिता झमेली पासवान ने बताया कि वह समाज में लोगों से चंदा किया था. चंदा के रूप में एक लाख रुपये राशि जमा हुआ था. गांव के गणमान्य लोगों के साथ एक लाख भारतीय मुद्रा के साथ शव लेने के लिए पहुंचे थे. लेकिन अस्पताल प्रबंधन पूरी राशि जमा करने के बाद ही शव देने की बात पर अड़े थे. इसके बाद वे लोग मायूस होकर घर लौट गये. घर लौटने के बाद हिंदू रिति रिवाज के साथ श्राद्धकर्म संपन्न करा लिया.

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