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Home बिहार सुपौल ई-केवाईसी नहीं कराई तो कट जाएगा नाम, प्रशासन अलर्ट, इतने लोग अब भी बाकी

ई-केवाईसी नहीं कराई तो कट जाएगा नाम, प्रशासन अलर्ट, इतने लोग अब भी बाकी

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ई-केवाईसी नहीं कराई तो कट जाएगा नाम, प्रशासन अलर्ट, इतने लोग अब भी बाकी
सांकेतिक फोटो

Ration Card Ekyc: सुपौल जिले में सरकारी राशन का लाभ लेने वाले परिवारों के लिए एक जरूरी खबर है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अब सभी राशन कार्डधारकों के लिए ई-केवाईसी (E-KYC) करवाना अनिवार्य कर दिया गया है. खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सख्त निर्देशों के बाद जिला प्रशासन इस काम को तेजी से पूरा करने में जुटा है, ताकि राशन वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाया जा सके और फर्जीवाड़े को रोका जा सके.

क्या बोले अधिकारी

सुपौल में अब तक 16 लाख 31 हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी ई-केवाईसी पूरी कर ली है, लेकिन प्रशासन के लिए चिंता की बात यह है कि अभी भी लगभग 20 प्रतिशत लाभार्थी इस प्रक्रिया से दूर हैं. अधिकारियों का कहना है कि अगर समय रहते बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन नहीं कराया गया, तो पात्र लोग भी सरकारी अनाज की सुविधा से हाथ धो सकते हैं.

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असली हकदार को मिले अनाज

इस प्रक्रिया का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी अनाज केवल उन्हीं जरूरतमंदों तक पहुंचे जो इसके असली हकदार हैं. ई-केवाईसी के जरीय अपात्र और फर्जी कार्डधारकों को सूची से बाहर कर दिया जाएगा.

जिला आपूर्ति पदाधिकारी राजीव कुमार ने कहा है कि जिन लोगों का आधार कार्ड राशन कार्ड से जुड़ा तो है, लेकिन उन्होंने ई-पॉस मशीन पर अपना अंगूठा लगाकर सत्यापन नहीं कराया है, वे तुरंत अपने नजदीकी डीलर के पास जाकर इसे पूरा करें.

फरवरी महीने तक यह काम पूरा न होने पर राशन मिलने में भारी दिक्कत आ सकती है. प्रशासन का मकसद किसी का राशन काटना नहीं, बल्कि व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करना है.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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