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Home बिहार सुपौल जिंदा थे सुपौल के बुजुर्ग, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में हो गए मृत, सालों तक बंद रही पेंशन

जिंदा थे सुपौल के बुजुर्ग, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में हो गए मृत, सालों तक बंद रही पेंशन

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जिंदा थे सुपौल के बुजुर्ग, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में हो गए मृत, सालों तक बंद रही पेंशन
सरकारी रिकॉर्ड की एक गलती ने छीनी बुजुर्ग की पेंशन

किशनपुर (सुपौल) से जीवछ प्रसाद,

Supaul Pension News: सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड में ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 65 वर्षीय बुजुर्ग को सरकारी अभिलेखों में मृत दिखाकर सामाजिक सुरक्षा पेंशन रोक दी गई.

सबसे हैरानी की बात यह है कि बुजुर्ग कई वर्षों तक अपनी पेंशन बहाल कराने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे. आखिरकार शिकायत के बाद हुई जांच में पूरा मामला खुल गया और प्रशासनिक लापरवाही उजागर हो गई.

जीवित थे लाभार्थी, फिर भी रिकॉर्ड में बना दिया मृत

मामला किशनपुर प्रखंड के परसा माधो पंचायत के कलिमगुरा वार्ड संख्या-3 निवासी 65 वर्षीय बेचू पासवान का है. उन्हें इंदिरा गांधी वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ मिल रहा था.

लेकिन जीवन प्रमाणीकरण नहीं होने के आधार पर सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत मान लिया गया और सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान बंद कर दिया गया. इसके बाद बुजुर्ग लगातार अपनी पेंशन दोबारा शुरू कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे.

शिकायत के बाद जांच में सामने आई बड़ी सच्चाई

मामले की शिकायत अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष पहुंची, जिसके बाद पूरे प्रकरण की जांच कराई गई.

जांच में स्पष्ट हुआ कि बेचू पासवान पूरी तरह जीवित हैं और उन्हें मृत घोषित किया जाना तथ्यात्मक रूप से गलत था. जांच रिपोर्ट में इसे संबंधित कर्मियों की गंभीर लापरवाही माना गया.

पटना: बीएसएससी अभ्यर्थियों ने लंबित परीक्षाओं की तिथि जारी करने की मांग को लेकर आयोग कार्यालय में प्रदर्शन किया. 10-15 दिन में तारीख नहीं आने पर महाआंदोलन की चेतावनी दी.

Supaul Pension News: BDO को पेंशन बहाल करने का निर्देश

जांच रिपोर्ट के आधार पर अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने किशनपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को निर्देश दिया है कि लाभार्थी का जीवन प्रमाणीकरण कराकर उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन तत्काल पुनः शुरू कराई जाए.

इसके साथ ही भविष्य में इस तरह की गलती दोबारा न हो, इसके लिए आवश्यक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया है.

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प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

यह मामला सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में बरती जा रही लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करता है. यदि समय रहते शिकायत नहीं की जाती, तो एक जीवित बुजुर्ग लंबे समय तक सरकारी सहायता से वंचित रह सकते थे.

अब प्रशासन के निर्देश के बाद बेचू पासवान को दोबारा पेंशन मिलने की उम्मीद जगी है. वहीं इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि सरकारी रिकॉर्ड में छोटी-सी चूक भी किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन पर बड़ा असर डाल सकती है.

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