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Home बिहार सुपौल शतचंडी महायज्ञ से सद्भाव व शांति का होता है संचार – आचार्य कृष्णानंद

शतचंडी महायज्ञ से सद्भाव व शांति का होता है संचार – आचार्य कृष्णानंद

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शतचंडी महायज्ञ से सद्भाव व शांति का होता है संचार – आचार्य कृष्णानंद

– भव्य शतचंडी महायज्ञ का समापन, श्रद्धा-भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा इलाका – समापन के मौके पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब सुपौल. सदर प्रखंड अंतर्गत बरुआरी पश्चिम स्थित मां दुर्गा, दस महाविद्या, नवग्रह एवं श्रीकृष्ण मंदिर परिसर में आयोजित भव्य शतचंडी महायज्ञ का मंगलवार को विधिवत समापन हो गया. महायज्ञ के अंतिम दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला. जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में डुबो दिया. यज्ञ स्थल सहित संपूर्ण मंदिर परिसर दिनभर वेद मंत्रों के सश्वर उच्चारण, हवन की पवित्र सुगंध और जय माता दी के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान रहा. स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के गांवों से आए भक्तों ने माता के दर्शन कर यज्ञ में सहभागिता की. अंतिम दिन की भव्यता और दिव्यता ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया. आचार्य कृष्णानंद जी शास्त्री के पावन निर्देशन में हुआ महायज्ञ यह शतचंडी महायज्ञ सुप्रसिद्ध पौराणिक कथावाचक आचार्य कृष्णानंद जी शास्त्री पौराणिक महाराज के पावन निर्देशन में विधिवत रूप से संपन्न कराया गया. उनके मार्गदर्शन में संपूर्ण अनुष्ठान शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार संपन्न हुआ. आचार्य ने अपने प्रवचनों और मार्गदर्शन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और मानव कल्याण का संदेश दिया. आचार्य कृष्णानंद जी शास्त्री ने कहा कि शतचंडी महायज्ञ न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का माध्यम है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सद्भाव और शांति का संचार भी करता है. उनके सान्निध्य में संपन्न इस महायज्ञ ने क्षेत्रवासियों को धर्म के प्रति और अधिक आस्थावान बनाया. सुबह से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान, वेद मंत्रों से गूंजा यज्ञ स्थल महायज्ञ के अंतिम दिन प्रातःकाल से ही यज्ञ स्थल पर धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम आरंभ हो गया. उपाचार्य पवन पांडेय एवं ब्रह्मा शास्त्री हिमांशु त्रिपाठी द्वारा शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार मुख्य यजमान सहित अनेक यजमानों को विधिवत पूजा-अर्चना कराई गई. वेद मंत्रों के सश्वर उच्चारण के बीच अग्निदेव को पूर्ण आहुति अर्पित की गई. यज्ञ मंडप में उपस्थित श्रद्धालु मंत्रोच्चारण के साथ तालमेल बिठाते हुए भाव-विभोर नजर आए. हवन कुंड से उठती पवित्र अग्नि और धूप-दीप की सुगंध ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया. यज्ञ में शामिल यजमानों ने पूरे श्रद्धा भाव के साथ अनुष्ठान संपन्न किया. उन्होंने मां भगवती से अपने परिवार की सुख-शांति, आरोग्यता, समृद्धि तथा समाज के सर्वांगीण कल्याण की कामना की. महिला, युवा व बुजुर्गों की उल्लेखनीय रही भागीदारी महायज्ञ में महिला, पुरुष, बुजुर्गों और युवाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति ने आयोजन को और भी भव्य एवं जीवंत स्वरूप प्रदान किया. महिलाएं पारंपरिक वेश-भूषा में माता की आराधना में लीन नजर आईं. वहीं युवाओं ने सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. बुजुर्ग श्रद्धालु भी पूरे उत्साह के साथ यज्ञ दर्शन करते और मंत्रों का श्रवण करते दिखे. सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि धर्म और आस्था समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती है. 108 कन्याओं का पूजन व भोजन, भंडारे में उमड़ी भीड़ हवन-यज्ञ के उपरांत 108 कन्याओं को विधिवत पूजन कर भोजन कराया गया. कन्या पूजन के दौरान मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ कन्याओं को प्रसाद और उपहार प्रदान किए गए. इसके साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन किया गया. जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. भंडारे में बैठकर एक साथ भोजन करते श्रद्धालुओं के बीच आपसी भाईचारा और समरसता का सुंदर दृश्य देखने को मिला. दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु, क्षेत्र में दिखी रौनक महायज्ञ के अंतिम दिन भी दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. आसपास के गांवों के अलावा अन्य जिलों से आए भक्तों ने माता के दर्शन कर यज्ञ में सहभागिता की. इससे क्षेत्र में रौनक और उत्सव जैसा माहौल बना रहा. स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों के अनुसार, महायज्ञ के कारण क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि देखने को मिली. धार्मिक आयोजनों से जहां आध्यात्मिक लाभ होता है, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार को भी प्रोत्साहन मिलता है. इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में आयोजन समिति की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही. समिति के सदस्यों ने महीनों की तैयारी के बाद महायज्ञ को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया. आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि महायज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि समाज में सद्भाव, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना था. उन्होंने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगकर्ताओं और प्रशासन का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया. धार्मिक आयोजनों से मजबूत होती है सामाजिक एकता शतचंडी महायज्ञ जैसे आयोजनों से सामाजिक एकता और आपसी सौहार्द को मजबूती मिलती है. यहां लोग जाति, वर्ग और उम्र के भेदभाव से ऊपर उठकर एक साथ माता की आराधना करते हैं. महायज्ञ के दौरान दिए गए प्रवचनों में भी मानवता, सेवा, प्रेम और भाईचारे का संदेश प्रमुख रूप से दिया गया. इससे समाज में सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है. महायज्ञ में शामिल श्रद्धालुओं ने आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा की. कई श्रद्धालुओं ने कहा कि इस प्रकार का भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन लंबे समय बाद देखने को मिला. श्रद्धालुओं का कहना था कि यज्ञ और मंत्रोच्चारण से मन को शांति मिली और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ. उन्होंने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के निरंतर आयोजन की कामना की. भक्तिमय वातावरण के साथ महायज्ञ का हुआ समापन अंततः वैदिक मंत्रोच्चारण, पूर्णाहुति और माता के जयघोष के साथ भव्य शतचंडी महायज्ञ का विधिवत समापन हुआ. अंतिम दिन का दृश्य श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा. बरुआरी पश्चिम स्थित मां दुर्गा, दस महाविद्या, नवग्रह एवं श्रीकृष्ण मंदिर परिसर में आयोजित यह महायज्ञ न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक यादगार आयोजन बनकर क्षेत्रवासियों के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया.

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