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Home बिहार सुपौल कभी देशी शराब बेचने को मजबूर थी सीता देवी, आज पति संग चला रहीं मनिहारी दुकान

कभी देशी शराब बेचने को मजबूर थी सीता देवी, आज पति संग चला रहीं मनिहारी दुकान

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कभी देशी शराब बेचने को मजबूर थी सीता देवी, आज पति संग चला रहीं मनिहारी दुकान
सीता देवी

सुपौल से रोशन सिंह की रिपोर्ट

Jivika Success Story: बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी और ग्रामीण विकास विभाग की ‘जीविका’ (JIVIKA) परियोजना किस प्रकार सुदूर ग्रामीण इलाकों में महापरिवर्तन का संवाहक बन रही है, जिले के लक्ष्मीनिया पंचायत अंतर्गत कलिकापुर गांव की रहने वाली सीता देवी की जीवन यात्रा इस बात का सशक्त प्रमाण है कि यदि विपरीत परिस्थितियों में सही अवसर, वित्तीय सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति मिल जाए, तो घोर मुफ़लिसी को भी खुशहाली में बदला जा सकता है. कभी अत्यधिक गरीबी, घरेलू हिंसा और घोर निराशा के दलदल में फंसा यह महादलित परिवार आज न केवल आत्मनिर्भर बन चुका है, बल्कि समाज के लिए सम्मान और कामयाबी की एक नई मिसाल पेश कर रहा है.

शराब की लत ने ली थी जमीन, भूखे पेट सोने को मजबूर था परिवार

  • घरेलू हिंसा और तंगी: राज्य में शराबबंदी लागू होने से पहले सीता देवी का जीवन किसी नरक से कम नहीं था. उनके पति सरेन उरांव शराब के गंभीर व्यसनी (नशेड़ी) थे. नशे की हालत में वे रोजाना घर में मारपीट और गाली-गलौज करते थे, जिससे बच्चों के भविष्य पर बुरा असर पड़ रहा था.
  • सब कुछ हो गया था नीलाम: पति ने अपनी नशे की लत को पूरा करने के लिए घर की कृषि योग्य पैतृक जमीन तक बेच डाली. हालात इतने बदतर हो गए कि नशे के पैसों के लिए घर के थाली-बर्तन तक बिक गए. आर्थिक तंगी के कारण कई बार सीता देवी और उनके मासूम बच्चों को पूरे दिन भूखे पेट सोने पर मजबूर होना पड़ता था.
  • मजबूरी का काला धंधा: परिवार को भुखमरी से बचाने के लिए सीता देवी ने भारी मन से घर पर ही अवैध रूप से देशी शराब बनाकर बेचना शुरू किया. हालांकि, इस अवैध कार्य से उनके जीवन में सामाजिक उपेक्षा, पुलिस का डर और मानसिक तनाव और ज्यादा बढ़ गया.

शराबबंदी बनी वरदान; जीविका ने थामी उंगली, बदली आजीविका

जब बिहार सरकार ने सूबे में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू किया, तो सीता देवी का अवैध धंधा बंद हो गया. इसी बीच वे जीविका समूह से जुड़ीं और ‘सतत जीविकोपार्जन योजना’ (SJY) के तहत उनका चयन किया गया. ग्राम संगठन के माध्यम से मिले वित्तीय अनुदान और तकनीकी प्रशिक्षण के सहयोग से उन्होंने गांव में ही एक छोटी-सी ‘मनिहारी (कॉस्मेटिक व जनरल स्टोर) दुकान’ की नींव रखी. जीविका दीदियों के सतत मार्गदर्शन और सीता देवी की अटूट लगन से यह दुकान धीरे-धीरे चल निकली.

Jivika Success Story: पति ने छोड़ी शराब, मनिहारी दुकान के साथ अब लीज पर खेती और सपनों का आशियाना

  • पति बने बिजनेस पार्टनर: शराबबंदी के कड़े कानून के कारण पति सरेन उरांव की शराब की लत पूरी तरह छूट गई. नशा मुक्त होने के बाद उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ. आज वे अपनी पत्नी सीता देवी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दुकान का संचालन करते हैं, जिससे घर में सुख-शांति और आपसी सम्मान बहाल हुआ है.
  • आय के अन्य स्रोतों का विस्तार: दुकान से होने वाली नियमित बचत से सीता देवी ने एक दुधारू गाय खरीदी, जिससे दूध बेचकर उन्हें अतिरिक्त दैनिक आय होने लगी. इसके साथ ही उन्होंने अपनी आर्थिक सूझबूझ का परिचय देते हुए गांव में एक बीघा उपजाऊ जमीन लीज (बटाई) पर लेकर आधुनिक खेती शुरू की है.
  • बन रहा है सपनों का पक्का घर: कभी फूस और तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर इस परिवार की आर्थिक स्थिति आज इतनी सुदृढ़ हो चुकी है कि सीता देवी अपने खुद के पैसों से गांव में अपने सपनों का पक्का (कंक्रीट) मकान बनवा रही हैं, जिसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में है.

सीता देवी गर्व से कहती हैं कि यदि मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच वाली शराबबंदी नीति और जीविका का सुरक्षा कवच नहीं मिलता, तो उनका परिवार शायद कभी उस अंधेरे से बाहर नहीं निकल पाता. आज वे आत्मनिर्भर होकर समाज की अन्य पीड़ित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं.

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