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Home बिहार सुपौल विधिक सेवा प्राधिकार ने नागरिकों को दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया व अधिकारों की दी जानकारी

विधिक सेवा प्राधिकार ने नागरिकों को दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया व अधिकारों की दी जानकारी

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विधिक सेवा प्राधिकार ने नागरिकों को दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया व अधिकारों की दी जानकारी

जेजे अधिनियम व दत्तक ग्रहण कानूनों को लेकर गांधी मैदान में विधिक जागरूकता कार्यक्रम

सुपौल. बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के आदेशानुसार व जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव मो अफजल आलम के निर्देश पर गांधी मैदान सुपौल में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों को जेजे अधिनियम व हिंदू दत्तक ग्रहण व भरण-पोषण अधिनियम से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना था. कार्यक्रम में बताया गया कि जेजे अधिनियम सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है, जबकि हिंदू दत्तक ग्रहण व भरण-पोषण अधिनियम हिंदू, बौद्ध, जैन व सिख समुदायों पर लागू होता है. जानकारी दी गयी कि भावी दत्तक माता-पिता का शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक रूप से स्वस्थ होना, आर्थिक रूप से सक्षम होना व किसी जीवन-घातक बीमारी से मुक्त होना अनिवार्य है. कार्यक्रम में दत्तक ग्रहण से संबंधित आयु मानदंडों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि बच्चे और दत्तक माता-पिता के बीच न्यूनतम 25 वर्ष का आयु अंतर होना आवश्यक है.

अविवाहित पुरुष किसी बालिका को नहीं ले सकता है गोद

दंपती की संयुक्त अधिकतम आयु 90 से 110 वर्ष तक हो सकती है, जो बच्चे की आयु पर निर्भर करती है. अविवाहित व्यक्ति गोद ले सकते हैं, लेकिन अविवाहित पुरुष किसी बालिका को गोद नहीं ले सकता. विवाहित दंपतियों के लिए पति-पत्नी दोनों की सहमति अनिवार्य है. बताया गया कि न्यायालय की ओर से अंतिम आदेश पारित होने के बाद दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया अपरिवर्तनीय हो जाती है. गोद लिए गए बच्चे को जैविक संतान के समान ही सभी कानूनी अधिकार और दर्जा प्राप्त होता है. कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि केवल कानूनी रूप से स्वतंत्र बच्चे जैसे अनाथ, परित्यक्त अथवा स्वेच्छा से सौंपे गए बच्चे को ही दत्तक ग्रहण के लिए रखा जाता है. ताकि बाल कल्याण सुनिश्चित किया जा सके. कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता विमलेश कुमार, पराविधिक स्वयंसेवक मो निजाम एवं मो अज्जम आदि मौजूद थे.

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