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Home बिहार सुपौल SUPAUL 13 साल बाद भी अधूरा पैक्स गोदाम, बिना स्वीकृति निर्माण से खुली परत-दर-परत गड़बड़ी

SUPAUL 13 साल बाद भी अधूरा पैक्स गोदाम, बिना स्वीकृति निर्माण से खुली परत-दर-परत गड़बड़ी

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SUPAUL 13 साल बाद भी अधूरा पैक्स गोदाम, बिना स्वीकृति निर्माण से खुली परत-दर-परत गड़बड़ी

जदिया (सुपौल) से उमेश कुमार की रिपोर्ट :

कोरियापट्टी पूरब पंचायत में पैक्स गोदाम निर्माण से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है. प्रभात खबर की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2012-13 में शुरू हुआ यह निर्माण कार्य तेरह वर्ष बाद भी अधूरा है, जबकि बिना प्रशासनिक स्वीकृति के ही काम शुरू कर दिया गया था. सूत्रों के अनुसार, करीब 10 लाख 70 हजार रुपये की लागत से 200 एमटी क्षमता वाले गोदाम का निर्माण प्रस्तावित था. इसके तहत पहली किश्त के रूप में 3 लाख 21 हजार रुपये जारी किए गए. यह कार्य तत्कालीन पैक्स अध्यक्ष के कार्यकाल में शुरू हुआ, लेकिन उक्त राशि से केवल बेस (कुर्सी) स्तर तक ही निर्माण हो सका और उसके बाद काम ठप पड़ गया. मामला यहीं नहीं रुका. विभागीय अधिकारियों की पहल पर वर्तमान पैक्स अध्यक्ष सर्वेश कुमार ने निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया. बताया जाता है कि उन्होंने अपने स्तर से करीब 6 लाख 70 हजार रुपये खर्च कर भवन को लिंटर स्तर तक तैयार करा दिया. निर्माण के बाद जब उन्होंने विभाग से भुगतान की मांग की, तो पूरा मामला उजागर हो गया.

बैंक में खुला राज, खाते में नहीं थी राशि

विभाग की ओर से बैंक को भुगतान के लिए पत्र भेजा गया, लेकिन जांच में सामने आया कि गोदाम निर्माण मद में खाते में कोई राशि उपलब्ध ही नहीं है. इसके बाद जब विभागीय रिकॉर्ड खंगाले गए, तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कोरियापट्टी पूरब पंचायत के लिए गोदाम निर्माण की स्वीकृति ही जारी नहीं हुई थी. यानी बिना स्वीकृति के ही राशि जारी हुई, निर्माण कार्य शुरू हुआ और बाद में निजी स्तर पर लाखों रुपये खर्च कर भवन खड़ा कर दिया गया. यह पूरे सिस्टम में गंभीर लापरवाही और अनियमितता की ओर इशारा करता है.

कई स्तर पर जिम्मेदारी तय होना जरूरी

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब योजना स्वीकृत ही नहीं थी, तो पहली किश्त किस आधार पर जारी की गई. निर्माण कार्य की तकनीकी स्वीकृति किसने दी. निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी. और अब निजी तौर पर खर्च की गई राशि का भुगतान किस मद से होगा. ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक निर्माण कार्य का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की पोल खोलने वाला है. यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे मामले आगे भी सामने आते रहेंगे.

स्थल चयन भी संदेह के घेरे में

जांच में यह भी सामने आया है कि जिस स्थान पर गोदाम का निर्माण किया गया है, वह चारों ओर बांस और पेड़ों से घिरा हुआ है तथा आबादी से काफी दूर स्थित है. ऐसे में सुरक्षा, रख-रखाव और अनाज के परिवहन में गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थल भंडारण के लिहाज से उपयुक्त ही नहीं है.

जांच की मांग, प्रशासन पर टिकी नजर

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी अधिकारियों व कर्मियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि इस मामले में उदाहरण प्रस्तुत करने वाली कार्रवाई ही भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों पर रोक लगा सकती है. फिलहाल इस खुलासे के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल है. अब देखना यह है कि जांच कब शुरू होती है और जिम्मेदार लोगों पर कब तक कार्रवाई होती है.

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