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Home बिहार सुपौल सुपौल में चुनावी सरगर्मी तेज, डोर-टू-डोर कैंपेन में जुटे प्रत्याशी

सुपौल में चुनावी सरगर्मी तेज, डोर-टू-डोर कैंपेन में जुटे प्रत्याशी

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सुपौल में चुनावी सरगर्मी तेज, डोर-टू-डोर कैंपेन में जुटे प्रत्याशी

सुपौल. 11 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही सुपौल जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. प्रत्याशियों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए डोर-टू-डोर कैंपेन का जोरदार आगाज कर दिया है. अब जनसभाओं के साथ-साथ घर-घर पहुंचकर वोटरों से सीधा संवाद स्थापित करने पर उम्मीदवारों का फोकस है. जिले की सुपौल, त्रिवेणीगंज, पिपरा, निर्मली और छातापुर विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार सुबह से लेकर देर शाम तक क्षेत्र की गलियों और बस्तियों में घूमते नजर आ रहे हैं. समर्थकों की टोलियां नारे लगाते हुए प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने में जुटी हैं. कहीं महिलाएं उम्मीदवारों को फूल-मालाओं से स्वागत कर रही हैं तो कहीं युवा वर्ग अपने पसंदीदा नेता के साथ सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर प्रचार को नया रंग दे रहा है. इस बार चुनावी रणनीति में खास बदलाव देखा जा रहा है. प्रत्याशी बड़े मंचीय भाषणों के बजाय लोगों की व्यक्तिगत समस्याओं को समझने और उनके दरवाजे तक पहुंचने पर अधिक जोर दे रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में बिजली, सड़क, पानी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं. वहीं, शहरी क्षेत्र में विकास योजनाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चर्चाएं गर्म हैं. चुनावी माहौल के बीच जिला प्रशासन भी पूरी सतर्कता बरत रहा है. निर्वाचन आयोग के निर्देश पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. फ्लाइंग स्क्वॉड और निगरानी टीमें लगातार गश्त कर रही हैं ताकि आचार संहिता का उल्लंघन न हो सके. जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, वैसे-वैसे प्रत्याशियों के बीच मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की होड़ बढ़ती जा रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार डोर-टू-डोर कैंपेन ही चुनावी जीत का असली आधार साबित हो सकता है. जनता किसे मौका देती है, यह तो 11 नवंबर को इवीएम का बटन दबने के बाद ही तय होगा, लेकिन फिलहाल सुपौल जिले की फिज़ा पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुकी है.

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