सुपौल से रोशन सिंह की रिपोर्ट:
Dr J Lal Tribute Meeting: जिले के प्रख्यात चिकित्सक एवं पहले एफआरसीएस डिग्रीधारी स्वर्गीय डॉ. जे. लाल के निधन पर सोमवार की शाम नगर परिषद, सुपौल एवं रोटरी क्लब के संयुक्त तत्वावधान में गांधी मैदान स्थित मंदिर परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. सभा में बड़ी संख्या में चिकित्सकों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों एवं गणमान्य नागरिकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.
श्रद्धांजलि सभा में उमड़ी बड़ी संख्या में लोगों की भीड़
श्रद्धांजलि सभा में मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा ‘राघव’, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कन्हैया सिंह, डॉ. शांतिभूषण सिंह, स्पेशल पीपी विनय भूषण सिंह, समाजसेवी सुब्रत मुखर्जी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे. इसके अलावा नगर परिषद के वार्ड पार्षद गगन ठाकुर, शिवजी कामत, शिवराम यादव, राजा हसन, कामेश्वर पासवान, अमित कुमार झा समेत बड़ी संख्या में लोगों ने दिवंगत चिकित्सक को श्रद्धासुमन अर्पित किए.
‘डॉ. जे. लाल का जाना जिले के लिए अपूरणीय क्षति’
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि डॉ. जे. लाल का निधन केवल एक चिकित्सक का नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता के एक युग का अंत है. उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गरीबों और जरूरतमंदों की निस्वार्थ सेवा में समर्पित कर दिया. वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने चिकित्सा सेवा को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ते हुए समाज के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया.
एफआरसीएस की डिग्री के बाद भी सुपौल को बनाया कर्मभूमि
मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा ‘राघव’ ने कहा कि वर्ष 1973 में, जब सुपौल में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था, तब इंग्लैंड से प्रतिष्ठित एफआरसीएस की डिग्री प्राप्त करने के बाद डॉ. जे. लाल ने बड़े शहरों या विदेश में करियर बनाने के बजाय सुपौल को अपनी कर्मभूमि बनाया. उन्होंने कहा कि डॉ. जे. लाल चाहते तो दुनिया के किसी भी बड़े अस्पताल में अपनी सेवाएं दे सकते थे, लेकिन उन्होंने जिले की जनता की सेवा को ही अपना सबसे बड़ा धर्म माना.
उन्होंने कहा कि आज शायद ही सुपौल का कोई ऐसा परिवार होगा, जो डॉ. जे. लाल की चिकित्सकीय सेवा, स्नेह और मार्गदर्शन से लाभान्वित न हुआ हो.
दो मिनट का मौन रखकर दी गई श्रद्धांजलि
श्रद्धांजलि सभा के अंत में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया. उपस्थित लोगों ने डॉ. जे. लाल के आदर्शों, सेवा भावना और मानवीय मूल्यों को सदैव स्मरण रखने तथा उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया.
