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Home बिहार सुपौल महीने में एक दिन खुलता है डेंटिस्ट डॉक्टर का चेंबर, शिशु वार्ड लटका है ताला, जंग खा रहा उपकरण

महीने में एक दिन खुलता है डेंटिस्ट डॉक्टर का चेंबर, शिशु वार्ड लटका है ताला, जंग खा रहा उपकरण

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महीने में एक दिन खुलता है डेंटिस्ट डॉक्टर का चेंबर, शिशु वार्ड लटका है ताला, जंग खा रहा उपकरण

त्रिवेणीगंज. त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल आए दिन अपने कारनामों को लेकर सुर्खियों में बना रहता है. देखने में तो बाहर से अस्पताल की बिल्डिंग काफी सुसज्जित और चमचमाती नजर आती है. लेकिन बिल्डिंग के अंदर की व्यवस्था इसके ठीक विपरीत है. अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं. यहां महीने में एक बार हर माह के 09 तारीख को डेंटिस्ट डॉक्टर का चेंबर खुलता है और वे मरीजों को देखते हैं. बाकी दिन डेंटिस्ट डॉक्टर इमरजेंसी ओपीडी चेंबर में बैठते हैं और सामान्य मरीजों को देखते हैं. अस्पताल में एक्स-रे की व्यवस्था नहीं रहने से दांत के रोगियों का समुचित इलाज नहीं हो पाता है. डेंटिस्ट डॉक्टर के चेंबर में ताला लटका रहना अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही को दर्शाता है. इमरजेंसी ओपीडी में बैठते हैं डेंटिस्ट चिकित्सक अनुमंडलीय अस्पताल त्रिवेणीगंज में डेंटिस्ट चिकित्सक डॉ कृतिका किरण के पिछले तीन-चार वर्षों से पदस्थापित होने के बावजूद दांत के रोगियों का समुचित इलाज नहीं हो पाता है. इलाज के लिए लाखों रुपए की लागत से विभाग ने जो उपकरण दिए हैं, वह अस्पताल में यूं ही वर्षों से पड़े हुए हैं. डेंटिस्ट विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ कृतिका किरण से जब इस बाबत बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है, हमने यहां दंत रोगियों का उपचार किया है. जरूरत के हिसाब से बहुत सारे रोगियों के दांतों को उपकरण के माध्यम से इलाज किया है. कहा कि वे सामान्य इमरजेंसी ओपीडी में अन्य डॉक्टरों के साथ बैठते हैं. वहीं पर मरीजों को देखते हैं. जरूरत के हिसाब से उनको अपने चेंबर में लाकर उपचार करते हैं. कहा कि अस्पताल में डेंटिस्ट उपकरण जंग नहीं खा रहा है. बल्कि उनका जरूरत के हिसाब से उपयोग किया जाता है. जो बेसिक ट्रीटमेंट होता है, वही करते हैं. बिना एक्स-रे के दांत से संबंधित बीमारियों का उपचार करने में दिक्कत होती है. शिशु वार्ड और विशेषज्ञ डॉक्टर के चेंबर में लटका है ताला अनुमंडलीय अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं रहने से अस्पताल के शिशु वार्ड और डॉक्टर के चेंबर में हमेशा ताला लटका रहता है. जिससे बीमार शिशुओं के उपचार में भारी परेशानी होती है. शिशु वार्ड में शिशुओं के उपचार के लिए जो भी सहायक उपकरण है, वह जंग खा रहा है. मरीज के परिजन बाजार में निजी क्लिनीक, नर्सिंग होम व निजी अस्पतालों में अपने शिशुओं का इलाज कराते हैं और आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं. इस मामले को लेकर जब अस्पताल प्रबंधक एस अदीब अहमद से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यहां शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है. यहां जो शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ देव दिवाकर थे, उनकी प्रतिनियुक्ति करीब आठ माह पूर्व ही सदर अस्पताल में हो गया है. अभी शनिवार को एक डॉक्टर श्रवण कुमार शिशुओं का इलाज करते हैं. जब विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है तो यहां उनका इलाज कौन करेगा. इसलिए शिशु वार्ड और शिशु विशेषज्ञ डॉक्टर के चेंबर में ताला लटका रहता है. कहते हैं प्रभारी उपाधीक्षक इस संबंध में त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ इंद्रदेव यादव ने बताया कि शिशु वार्ड में कोई विशेष उपकरण नहीं है. डेंटिस्ट डॉक्टर का चेंबर प्रतिदिन खुलता है, जब जरूरत पड़ता है तो उसे खोलकर मरीजों का उपचार किया जाता है. डेंटिस्ट चिकित्सक सामान्य इमरजेंसी ओपीडी में बैठते हैं.

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