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Home बिहार सुपौल अतिक्रमण की वजह से उद्धारक का बाट जो रहा अंग्रेज जमाने का डाक बंगला

अतिक्रमण की वजह से उद्धारक का बाट जो रहा अंग्रेज जमाने का डाक बंगला

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अतिक्रमण की वजह से उद्धारक का बाट जो रहा अंग्रेज जमाने का डाक बंगला

पिपरा. मुख्यालय से दो हाईवे एनएच 327 ई एवं एनएच 106 गुजरती है. पिपरा पंचायत को नगर पंचायत का भी दर्जा मिल चुका है. मुख्यालय में ही प्रखंड सह अंचल कार्यालय, थाना परिसर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आदि अवस्थित है. किशनपुर और पिपरा दो प्रखंड को मिलाकर 42 पिपरा विधानसभा क्षेत्र भी अस्तित्व में आ चुका है. लेकिन यहां एक अदद अतिथि गृह (डाक बंगला) नहीं है. जबकि वर्तमान स्थिति में पिपरा में मेडिकल कॉलेज और रेलवे स्टेशन जैसे प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. निरीक्षण के क्रम में अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है.

पूर्व में संचालित था निरीक्षण भवन

पूर्व में कोसी प्रोजेक्ट परिसर में सिंचाई विभाग का निरीक्षण भवन बना हुआ था. जहां वरीय अधिकारी आकर ठहरते थे. विधायक, सांसद यहां आकर रुकते थे और आमलोगों से मिलते थे. सिंचाई विभाग द्वारा निरीक्षण भवन में बजाप्ता खानसामा, अटेंडेंट आदि की भी नियुक्ति की गई थी. वर्तमान में निरीक्षण भवन की उपयोगिता को नजरअंदाज करते हुए सिंचाई विभाग के इस निरीक्षण भवन में विभाग का कार्यालय शिफ्ट कर दिया गया है. जिस पर वरीय पदाधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधियों तक किसी का भी ध्यान नहीं गया या इसकी जरूरत नहीं समझी गई. इससे पूर्व पिपरा में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया डाक बंगला भी था. जिसे बाद में चकबंदी कार्यालय में तब्दील कर दिया गया. वर्तमान में अतिक्रमित होने के कारण यह डाक बंगला परिसर खुद के उद्धार का बाट जोह रहा है.

नये निरीक्षण भवन निर्माण के लिए मंत्री से किया गया है आग्रह

इस बाबत पूछे जाने पर क्षेत्रीय विधायक रामविलास कामत ने कहा कि यह समस्या उनके संज्ञान में है. इस संबंध में उन्होंने सिंचाई विभाग के मंत्री से मिलकर कोसी प्रोजेक्ट परिसर में नये निरीक्षण भवन सह अतिथि गृह निर्माण करने का आग्रह किया है. साथ ही नये भवन के निर्माण तक कोसी निरीक्षण भवन पिपरा में चल रहे कार्यालय को शिफ्ट कर निरीक्षण भवन को पूर्ववत बनाए रखने का भी अनुरोध किया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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