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Home बिहार सुपौल टूरिस्ट परमिट पर अवैध रूप से अन्य प्रदेशों के लिए बसों का हो रहा संचालन

टूरिस्ट परमिट पर अवैध रूप से अन्य प्रदेशों के लिए बसों का हो रहा संचालन

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सुपौल : विश्वव्यापी कोरोना संक्रमण से बिहार सहित पूरा देश जूझ रहा है. इसे लेकर सरकार द्वारा सामान्य ट्रेनों का परिचालन भी बंद कर दिया गया है. बावजूद इन दिनों सुपौल जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में टूरिस्ट बसों के माध्यम से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा जैसे अन्य प्रदेशों में लोगों का बिना रोकटोक धड़ल्ले से आवागमन हो रहा है. जबकि इन बसों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर मास्क, सैनिटाइजर आदि की व्यवस्था बिल्कुल ही नगण्य होती है. शनिवार को दिल्ली जैसे कोरोना के हॉट स्पॉट एरिया से तकरीबन 60 मजदूरों का जत्था एक टूरिस्ट बस में भरकर लाया गया. जिसमें ना तो मजदूरों ने मास्क लगा रखा था और ना ही बस में सोशल डिस्टेंस का ख्याल रखा जा रहा था.

प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी द्वारा नहीं की जाती रोक-टोक : हालांकि कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर जिला प्रशासन सहित स्वास्थ्य विभाग ऐड़ी-चोटी का जोर लगाये हुए हैं. लेकिन इस प्रकार बसों में बाहर प्रदेशों से लाये जा रहे मजदूरों की अब ना तो जांच करायी जा रही है और ना ही उनका रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है. इससे अन्य लोगों में संक्रमण फैलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. गौरतलब है कि जिला प्रशासन द्वारा बस स्टैंड में यात्रियों की सुविधा व सुरक्षा के लिये दंडाधिकारी सहित पुलिस बल की तैनाती की गई है. लेकिन हैरत की बात है कि प्रतिनियुक्त पदाधिकारी व पुलिस बल द्वारा ऐसे बाहर प्रदेश से आने वाले बस चालकों से ना तो कुछ पूछताछ की जा रही है और ना ही बस में कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर सुरक्षा के इंतजामात का जायजा लिया जा रहा है. नतीजा है कि बस संचालक मनमर्जी तरीके से बसों को संचालन कर रहे हैं.

वसूला जा रहा मनमाना किराया : परिवहन विभाग द्वारा एक राज्य से दूसरे राज्य में बसों के सार्वजनिक परिचालन की अनुमति नहीं दी गई है. लेकिन जुगाड़ टेक्नोलॉजी के माध्यम से टूरिस्ट परमिट के आधार पर सार्वजनिक रूप से बसों का धड़ल्ले से परिचालन किया जा रहा है. लोगों की मानें तो संबंधित विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसे बसों का परिचालन किया जाता है. जिससे सरकार को भी राजस्व की क्षति होती है. वहीं जानमाल का खतरा भी बना रहता है.

लॉकडाउन से पहले दिल्ली का बस किराया 1100 रुपये लिया जाता था. लेकिन इन दिनों बस भाड़ा के रूप में प्रति यात्री 3000 से 3500 रुपये वसूल किया जा रहा है. ट्रेन सेवा नहीं रहने के कारण विशेष तौर पर मजदूर वर्ग के लोग रोजी-रोजगार की तलाश में अन्य प्रदेश जाने के लिए मजबूरन ऐसे बसों का सहारा लेते हैं. जिससे निजी टूरिस्ट बस परमीट वाले संचालक की चांदी कट रही है.

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