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Home बिहार सुपौल शराब नहीं मिल रही, तो कफ सिरप पी रहे युवा

शराब नहीं मिल रही, तो कफ सिरप पी रहे युवा

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शराब नहीं मिल रही, तो कफ सिरप पी रहे युवा

वैकल्पिक नशे के रूप में कोडीन युक्त कफ सिरप का का इस्तेमाल कर रहे लोग

इलाके में जहां-तहां आसानी से फेंकी दिख जाती है कफ सिरप की खाली बोतल

शराबबंदी के बाद नशेड़ी कर रहे धड़ल्ले से इस्तेमाल

बिना पुर्जे के कफ सिरप बेच रहे दुकानदार, लेते हैं अधिक दाम

नियम के विरुद्ध दुकानदार कर रहे बिक्री, स्वास्थ्य विभाग मौन

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फोटो – 01 : हाल के दिनों में बरामद कफ सिरप.

प्रतिनिधि, सुपौल

सूबे में पूर्ण शराबबंदी है. शराब पीने और शराब की बिक्री पर नकेल कसने के लिए तमाम सरकारी अमला सक्रिय है. लेकिन वहीं दूसरी तरफ शराब के शौकीन शराब नहीं मिलने पर नशे के वैकल्पिक चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें दवा के रूप में प्रयोग होने वाली कोडीन युक्त कफ सिरप भी शामिल है. इलाके के खेतों में फेंके गये हजारों कोडिन युक्त कफ सिरप की शीशी इस बात की गवाही दे रही है, कि ये दवा किसी बीमारी से निजात के लिए नहीं बल्कि नशे के रूप में इस्तेमाल की जा रही है. कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के रूप में किये जाने का मामला आम हो चुका है. बावजूद इसे लेकर ड्रग विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा.

एक शीशी सिरप में 200 एमएल शराब का नशा

जिसे इस दवा लत लग गयी है, वे इसके बिना नहीं रह सकते. यह स्थिति शराबबंदी के बाद बनी है. जब लोगों को आसानी से शराब नहीं मिल पाती है, तब लोग इस तरह के नशे के आदि होने लगे हैं. चिंता का विषय है कि अधिकतर युवा ही इसकी चपेट में आ गये हैं. जानकारों का कहना है कि कोडीन युक्त सिरप का सेवन करने से लगभग दो सौ मिलीलीटर शराब के बराबर नशा होता है. खास बात ये भी है कि पीने वाले के मुंह से शराब जैसी दुर्गंध भी नहीं आती. नाम नहीं छापने कि शर्त पर स्थानीय युवाओं ने बताया कि बाजार में ऐसी दवाओं की खपत आज कल काफी बढ़ गयी है. लोग नशे के लिए इसका धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं.

विभाग की आंखों में धूल झोंक रहे अवैध कारोबारी

कोडीन युक्त इस कफ सिरप के व्यापक पैमाने पर खपत के बावजूद इस दिशा में ड्रग विभाग ना तो कभी जांच कर रहा है और ना ही कभी किसी के विरुद्ध कोई करवाई की है. लिहाजा ड्रग विभाग कि कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है. जाहिर सी बात है जब कफ सिरप का उपयोग सर्दी-खांसी में दवा के रूप में की जाती है. जानकारों की मानें तो बाजार में दुकानदार को डॉक्टर के पुर्जे पर ही कोडीन युक्त दवा देनी है. तो क्या इतनी संख्या में फेंकी गयी शीशी का लेखा-जोखा मिल पायेगा? या फिर चोरी-छिपे दवा दुकानदार मुनाफे के इस कारोबार में स्वास्थ्य विभाग को चकमा दे रहे हैं. या फिर शराबबंदी के वैकल्पिक व्यवस्था को बढ़ावा दे रहे हैं. भोले-भाले युवाओं को तिल-तिल कर मारने की कोशिश कर रहे हैं. लोगों की मानें तो व्यापक पैमाने पर कोडीन युक्त कफ सिरप के खपत की विभागीय स्तर से जांच होनी चाहिए. दुकानों की भी जांच होनी चाहिए. इस गोरखधंधे में जो भी लोग दोषी हों, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.

आसानी से मिल रही है दवा, तो बढ़ रहा चलन

जानकारों की मानें तो किसी भी मेडिकल स्टोर पर बिना डॉक्टर के पुर्जे के कोडीन युक्त ये दवा नहीं मिल सकती है. लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण ऐसा व्यावहारिक रूप से होता नहीं है. ये दवा बाजार में आसानी से ना सिर्फ मिल जाती है, बल्कि दुकानदार इसे थोक में दे देते हैं. क्योंकि दुकानदारों द्वारा इसे दो-तीन गुना दाम में बेचा जाता है. अधिक मुनाफा कमाने के फेर में युवाओं का जीवन नष्ट कर रहे ऐसे दोषी दवा व्यवसायियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की दरकार है.

बिना पुर्जे का दवा देना गलत : सीएस

कोडीन युक्त कफ सिरप तो दूर, कोई भी दवा किसी भी दुकानदार को डॉक्टर के पुर्जे पर ही बेचना है. अगर बिना पुर्जे की दवा दी जाती है, तो गलत है. किसी भी एक स्थान पर बड़ी संख्या में कफ सिरप की बोतल फेंकी होना जांच का विषय है. इस मामले में जांच कर कार्रवाई की जायेगी.

-डॉ ललन ठाकुर, सीएस

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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