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Home बिहार सुपौल डेढ़ साल तक बचती रहीं सीओ, अब भ्रष्टाचार के आरोपों में विभागीय कार्रवाई शुरू

डेढ़ साल तक बचती रहीं सीओ, अब भ्रष्टाचार के आरोपों में विभागीय कार्रवाई शुरू

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डेढ़ साल तक बचती रहीं सीओ, अब भ्रष्टाचार के आरोपों में विभागीय कार्रवाई शुरू

किशनपुर की तत्कालीन अंचल अधिकारी पर दाखिल-खारिज मामलों में अनियमितता और फीफो सिस्टम उल्लंघन का आरोप

सुपौल.

किशनपुर अंचल की तत्कालीन अंचल अधिकारी सुशीला कुमारी पर दाखिल-खारिज मामलों में अनियमितता, विभागीय आदेशों की अवहेलना व फीफो (फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट) प्रणाली के उल्लंघन के आरोपों को लेकर अब विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है. यह जानकारी मंगलवार को किशनपुर प्रखंड के पूर्व प्रमुख सूर्यनारायण यादव ने प्रेस वार्ता के दौरान दी. उन्होंने बताया कि 06 दिसंबर 2024 को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत भेजकर सीओ सुशीला कुमारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए व्यक्तिगत लाभ के उद्देश्य से दाखिल-खारिज मामलों के निष्पादन में मनमानी की, विभागीय निर्देशों का उल्लंघन किया तथा जांच प्रतिवेदनों में हेरफेर की.

वरीय अधिकारियों के संरक्षण के कारण नहीं बढ़ सकी कार्रवाई आगे

सूर्यनारायण यादव ने कहा कि शिकायत के आधार पर 27 दिसंबर 2024 को विभाग ने जिलाधिकारी को जांच का आदेश दिया था. इसके बाद मामला एडीएम और डीसीएलआर स्तर तक पहुंचा, लेकिन करीब डेढ़ वर्ष तक जांच लंबित रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि वरीय अधिकारियों के संरक्षण के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी. उन्होंने बताया कि अंततः राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के संयुक्त सचिव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीओ से शोकॉज पूछा और शिकायतों पर 15 दिनों के भीतर बिंदुवार जवाब देने का निर्देश दिया. इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की समीक्षा हुई और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर 05 जून 2026 को आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई.

पूर्व प्रमुख ने आरोप लगाया कि कई दाखिल-खारिज मामलों में राजस्व कर्मचारी और राजस्व पदाधिकारी की स्वीकृति अनुशंसा के बावजूद अनावश्यक आपत्तियां लगाकर मामलों को 180 से 281 दिनों तक लंबित रखा गया. वहीं पुराने मामलों को लंबित रखते हुए नए मामलों का निर्धारित समय सीमा में निष्पादन किया गया, जो फीफो प्रणाली का स्पष्ट उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि कई मामलों को महीनों तक लंबित रखने के बाद दस्तावेजों की कमी का हवाला देकर अस्वीकृत कर दिया गया. साथ ही जांच प्रक्रिया और प्रतिवेदन में हेरफेर कर पद का दुरुपयोग किया गया. मामले में विभागीय कार्रवाई शुरू होने के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. इस संबंध में पूछे जाने पर किशनपुर सीओ सुशीला कुमारी ने कहा कि मुझे कार्रवाई के संबंध में कोई जानकारी नहीं है. हमने नियमानुसार कार्रवाई की है.

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