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Home बिहार सुपौल निष्पक्ष जांच व व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 935 जवान भूख हड़ताल पर बैठे

निष्पक्ष जांच व व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 935 जवान भूख हड़ताल पर बैठे

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निष्पक्ष जांच व व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 935 जवान भूख हड़ताल पर बैठे

वीरपुर. सीमावर्ती इलाके के भीमनगर में स्थित बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस में फूड प्वाइजनिंग मामले में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सोमवार की सुबह बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस 12 व 15 कैंप में करीब 935 प्रशिक्षु जवान भूख हड़ताल पर बैठ गये. बड़ी संख्या में प्रशिक्षु जवानों के भूख हड़ताल पर चले जाने की सूचना पर एक ओर जहां विभागीय अधिकारियों के बीच हलचल मच गयी, वहीं प्रशासनिक पदाधिकारी भी सन्न रह गये. भूख हड़ताल पर बैठे जवानों ने कमांडेंट के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नाराजगी व्यक्त की. लगभग पांच घंटे बाद मुजफ्फरपुर से डीआइजी सफी उल हक भीमनगर पहुंचे व जवानों से बातचीत की. जवानों की पीड़ा सुनने के बाद डीआइजी ने त्वरित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया. इसके बाद जवानों ने भूख हड़ताल समाप्त की. अधिकतर प्रशिक्षु जवानों की शिकायत मेस को लेकर थी. बैरक के शौचालय, बाथरूम, पानी टंकी आदि की नियमित साफ- सफाई नहीं होने से भी जवान नाराज थे. क्लासरूम की बिजली व्यवस्था, बेंच-डेस्क, पंखा आदि की शिकायत के बाद डीआइजी क्लास रूम एवं बैरक का मुआयना किये. मुआयने के दौरान देय सुविधा को तत्काल बहाल करने व दुरुस्त करने का निर्देश दिया. मौके पर कमांडेंट अशोक प्रसाद, सिविल सर्जन ललन ठाकुर, वीरपुर एसडीएम नीरज कुमार, बीएमपी डीएसपी रामनरेश पासवान, वीरपुर एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार, एलएन अनुमंडल अस्पताल उपाधीक्षक डॉ शैलेंद्र दीपक, भीमनगर थानाध्यक्ष दीपक कुमार आदि मौजूद थे. रविवार को जवानों ने सुबह करीब 8:30 बजे पूड़ी, जलेबी और काबुली चने की सब्जी खाया था. इसके बाद दोपहर करीब डेढ़ से दो बजे के बीच अचानक जवान बीमार पड़ने लगे, लेकिन उन्हें बाहर जाने नहीं दिया गया. जवानों को कैंप से ही कुछ दवा दी गयी. करीब सात बजे शाम में जवानों की तबीयत ज्यादा खराब होने लगी, तो आनन-फानन में 50 से 60 जवानों को वीरपुर स्थित अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया. इसके बाद थोड़ी-बहुत समस्या महसूस करनेवाले जवान भी अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचने लगे. देखते ही देखते रात 10:30 बजे तक जवानों की यह तादाद बढ़ कर 265 हो गयी. रात करीब एक बजे सभी को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया. जवानों का आरोप है कि ट्रेनिंग सेंटर में महज 400 अभ्यर्थियों के लिए वर्ग कक्ष की व्यवस्था है, लेकिन भेड़-बकरियों की तरह इसी कक्ष में 935 जवानों को बैठा कर प्रशिक्षण दिया जा रहा है. जवानों ने बताया कि फर्श पर बैठ कर किसी प्रकार प्रशिक्षण प्राप्त करना उनकी विवशता है. गौरतलब है कि विषाक्त भोजन करने से 265 पीटीसी प्रशिक्षु जवान बीमार हो गये थे. जवानों को उल्टी होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जवानों के बीमार पड़ने की खबर से पूरा प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गयी थी. हालांकि वीरपुर एसडीएम व एसडीपीओ अस्पताल पहुंच कर मोर्चे को तब तक संभाले रहे, जब तक जवान डिस्चार्ज नहीं हो गये. अधिकारियों के सहयोग में भीमनगर व वीरपुर पुलिस पदाधिकारी का सराहनीय योगदान रहा. जवानों की शिकायत के आलोक में डीआइजी ने कहा कि ट्रेनिंग सेंटर में कुव्यवस्था व फूड प्वाइजनिंग मामले की जांच वह स्वयं कर रहे हैं. सभी बैरक का निरीक्षण भी किया है. जिस जवान की थाली से जो सल्फास निकला था, उसे जब्त कर जांच के लिए लिया गया है. दो लोगों पर एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है. सभी जवानों की समस्याएं सुनी है. इसके बाद मेस का चार्ज सभी आठ कंपनी को ही दे दिया गया है. वह अपने हिसाब से मेस का संचालन करें. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो जायेगा. खाना जवानों के च्वाइस के अनुरूप बनेगा. कोई भी अधिकारी जवानों की शिकायत को नजरअंदाज नहीं करेगा. जो पैसे मेस संचालक को दिये गये हैं, उसमें खर्च किये गये पैसे को काटकर शेष राशि मेस संचालक लौटाएंगे. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी. किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. भवन के मामले में कहा कि तीन साल पुराने भवन की यह स्थिति नहीं होनी चाहिए. इस मामले में भी जांच की जा रही है. साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था की जाएगी.

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