[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार सुपौल विजय दिवस : 1971 का ऑपरेशन सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय : जेनरल लेफ्टिनेंट

विजय दिवस : 1971 का ऑपरेशन सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय : जेनरल लेफ्टिनेंट

0
विजय दिवस : 1971 का ऑपरेशन सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय : जेनरल लेफ्टिनेंट

– बीएसएस कॉलेज में विजय दिवस पर सम्मान समारोह का किया गया था आयोजन – दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का किया गया उद्घाटन सुपौल आज हम विजय दिवस की 54 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, आज के दिन भारत ने पाकिस्तान के साथ 13 दिन चली लंबी लड़ाई के बाद 16 दिसंबर 1971 को विजय प्राप्त की थी. इस दिन को न सिर्फ भारत की सेना की निर्णायक विजय के रूप में देखा जाता है, अपितु यह दिन आधुनिक सैन्य इतिहास में अद्वितीय रूप से भारतीय सैनिकों की बहादुरी और साहस को जश्न के रूप में मना जाता है. इसी के तहत सोमवार को भारत सेवक समाज महाविद्यालय स्थित सेमीनार हॉल में पूर्व सैनिक सेवा परिषद जिला इकाई सुपौल के बैनर तले विजय दिवस सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों से आये सैकड़ों पूर्व सैनिकों ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जेनरल अशोक कुमार चौधरी (सेवानिवृत), प्रदेश अध्यक्ष कर्नल एमपी सिंह, टीएनवीयू के पूर्व कुलपति एके राय, मेजर डॉ शशि भूषण प्रसाद, नगर परिषद के मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा राघव, प्राचार्य डॉ संजीव कुमार सहित अन्य अतिथियों व पूर्व सैनिकों ने दीप प्रज्जवलित कर किया. अतिथियों के स्वागत में कॉलेज की छात्रा द्वारा स्वागत गान प्रस्तुत किया गया. इसके पश्चात अतिथियों को मिथिला परंपरा के अनुसार, शॉल, पाग, माला व शिल्ड देकर सम्मानित किया गया. लेफ्टिनेट जनरल अशोक कुमार चौधरी ने कहा कि सैनिक या पूर्व सैनिक कभी रिटायर्ड नहीं होता है. वह देश के लिये आखिरी दम तक लड़ता है. आज का यह दिन सैनिक के शौर्य एवं जज्बे को सलाम करने का दिन है. आज हम उन शहीदों का याद करते हैं, जिन्होंने अपनी जान भारत माता की रक्षा के लिये न्योछावर कर दिया. हर एक सैनिक परिवार सैनिक का परिवार है. कहा कि 30 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने भारत के 11 एयरबेस पर हमला किया था, तब हम सबों का खून खौल गया था और उस समय जल, थल व वायु सेना के जाबांजों ने पाकिस्तान का ऐसा हाल किया कि पाकिस्तान जिंदगी भर भूल नहीं सकता है. 1971 का ऑपरेशन सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम इतिहास है. जिसे दुनिया की हर मिलेट्री याद करती है. महज 13 दिन के अंदर ही भारतीय सेना के जाबांजों ने ईस्ट पाकिस्तान को वेस्ट पाकिस्तान से अलग कर दिया और बांग्लादेश बनाया. कहा कि इस लड़ाई में पाकिस्तान के 93 हजार सैनिक ने हथियार के साथ सरेंडर किया था. कहा ऐसा लड़ाई द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कभी नहीं हुआ था. जिसमें इतने लोग पकड़े गये और सरेंडर कराया गया. आज भी दुनिया भर की मिलेट्री 1971 की लड़ाई पर स्टडी कर रहा है. इस लड़ाई में करीब 1400 भारतीय सैनिक शहीद हो गये थे. पाकिस्तान की आर्मी ने बांग्लादेश पर इतना जुल्म ढ़ाया था कि 30 लाख से अधिक बांग्लादेशी मारे गये थे और करीब एक करीब बांग्लादेशी मेवासित हुए थे. तब भारत देवदूत बन कर गया और बांग्लादेश को जिताया. आजादी दिला कर एक नये देश का सृजन किया. भारत आज एक विकसित देश की ओर अग्रसर हो रहा है. हम सब को भारतीय बनने की आवश्यकता है. कहा कि देश की रक्षा करने सरहद पर सैनिक मौजूद है मगर देश के अंदरुनी दुश्मनों को सतर्कता से पनपने से रोकना है. कर्नल एमपी सिंह ने कहा कि उक्त युद्ध में सैकड़ों भारतीय सैनिक शहीद हुए थे और इस युद्ध के परिणामस्वरूप पाकिस्तानी सेना ने एकपक्षीय आत्मसमर्पण किया था और फलत: बांग्लादेश नामक देश का गठन हुआ. कहा कि इस युद्ध से सैनिकों के अदम्य साहस की कई कहानियां भी सामने आईं. इसमें करीब 1313 भारतीय सैनिकों जिसमें थल सेना, नौ सेना व वायुसेना के सैनिकों को वीरता एवं अदम्य साहस के प्रदर्शन के लिए वीरता सम्मान भी प्रदान किए गए. मौके पर कोसी प्रमंडल के सुपौल सहरसा व मधेपुरा के शहीद परिवार एवं 1965/1971 के युद्ध में भाग लेनेवाले सैनिकों को सम्मानित किया गया. इसके बाद आइस फ्लेम प्रोडकशन द्वारा एक भक्तिगीत रब की परछाईं-सांई का अनावरण निर्माता निर्देशक सी शेखर जयसवाल निर्मित किया गया. मौके पर मेजर अमित प्रियदर्शी, कर्नल डा सोनू सुमन, कर्नल डा रविशंकर, श्रवण कुमार सिंह, हरेश पांडे, धर्मेंद्र सिह पप्पू, प्रवीण कुमार झा, रौशन कुमार, गोपाल मिश्र, आशुतोश शाही, अरुण सिंह, धर्मेंद्र सिंह, हरेंद्र प्रसाद, राजन झा, रमण सिंह, मनोज कुमार चौधरी, जितेंद्र सिंह आदि मौजूद थे. लोगों की आंखें हो गयी नम संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं, जो चिट्ठी आती है, वो पूछे जाती है, के घर कब आओगे, लिखो कब आओगे… स्नेह आर्यन के गाते ही सेमीनार हॉल में बैठे पूर्व सैनिकों सहित अनके परिजनों की आंखें नम हो गयी. थोड़ी देर के लिए मानों पूरा हॉल अपने वीर सपुतों के लिए शोकाकुल हो गये. स्वयं लेफ्टिनेंट जेनरल अशोक कुमार चौधरी ने खड़े होकर गायक का अभिवादन किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel