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Home बिहार सीवान फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान पर कागजी अड़चनों का रोड़ा

फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान पर कागजी अड़चनों का रोड़ा

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फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान पर कागजी अड़चनों का रोड़ा
सांकेतिक तस्वीर

प्रतिनिधि , गुठनी. फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान प्रखंड के किसानों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रखंड के लगभग 60 प्रतिशत किसानों का फार्मर रजिस्ट्रेशन पूरा नहीं हो सका है. प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन और इ-केवाइसी पूरा नहीं होगा, उन्हें किसान सम्मान निधि की अगली किश्त का लाभ नहीं मिल पाएगा. किसानों का कहना है कि बढ़ती खेती लागत, खाद-बीज और डीजल के दाम तथा अनिश्चित मौसम के दौर में पीएम किसान सम्मान निधि उनकी आर्थिक जरूरतों का अहम सहारा है. ऐसे में तकनीकी और कागजी अड़चनों के कारण योजना से बाहर होना उनके लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है. केवल उन्हीं किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है, जिनके नाम पर जमीन की जमाबंदी दर्ज है. जबकि प्रखंड में बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं, जिनकी जमीन अब भी पिता, दादा या अन्य पूर्वजों के नाम पर दर्ज है. ऐसे किसानों को शिविरों से यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि पहले अपने नाम पर जमाबंदी कराएं, तभी आवेदन स्वीकार होगा. गैर-रैयत किसानों के आवेदन सीधे खारिज किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में असंतोष बढ़ रहा है. जमीन अपने नाम पर दर्ज कराने के लिए किसानों ने अंचल कार्यालय में म्यूटेशन के आवेदन दे रखे हैं, लेकिन महीनों बीतने के बावजूद फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं. किसानों का कहना है कि खेत-खलिहान छोड़कर बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाना उनके लिए समय और पैसे दोनों की बर्बादी है. पंचायत स्तर पर लगाए गए विशेष शिविरों में नए निबंधन, पुराने लाभार्थियों का सत्यापन और ई-केवाईसी की जा रही है. प्रशासन ने चेतावनी दी है कि दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने या इ-केवाइसी नहीं होने पर नाम लाभार्थी सूची से हट सकता है. कई पंचायतों में प्रतिदिन औसतन 25 से 30 किसानों का ही निबंधन हो पा रहा है, जबकि पहुंचने वालों की संख्या कहीं अधिक है. आधार कार्ड और जमीन के कागजात में नाम की वर्तनी, पिता के नाम या उपनाम में मामूली अंतर होने पर भी रजिस्ट्रेशन रोक दिया जा रहा है. तकनीकी अड़चनों के चलते प्रक्रिया की गति प्रभावित- इंटरनेट की धीमी गति, सर्वर समस्या और पोर्टल की तकनीकी दिक्कतें भी रजिस्ट्रेशन की रफ्तार को प्रभावित कर रही हैं. इससे किसानों और कर्मियों दोनों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जमाबंदी नियम में अस्थायी राहत दी जाए, शिविरों की संख्या बढ़ाई जाए और म्यूटेशन प्रक्रिया को तेज किया जाए, ताकि कोई भी पात्र किसान योजना से वंचित न रह जाए. शिविर में त्रुटियों के सुधार एवं निराकरण की व्यवस्था- कई पंचायत में सर्वर खराब रहने या इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर होने की शिकायतें सामने आई है. दूर-दराज के गांवों से आए किसानों को यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि सिस्टम काम नहीं कर रहा है. किसानों का कहना है कि यदि सर्वर की व्यवस्था पहले से ही बता दी जाए तो उन्हें आने जाने की परेशानी न झेलनी पड़े.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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