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Home बिहार सीवान siwan news : बिना लाइसेंस के चल रहे मातृ ब्लड बैंक को डीएम के हस्तक्षेप से मिला ठिकाना

siwan news : बिना लाइसेंस के चल रहे मातृ ब्लड बैंक को डीएम के हस्तक्षेप से मिला ठिकाना

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siwan news : बिना लाइसेंस के चल रहे मातृ ब्लड बैंक को डीएम के हस्तक्षेप से मिला ठिकाना
सांकेतिक तस्वीर

siwan news : सीवान. प्रभात खबर में 29 दिसंबर को प्रकाशित खबर ””इस साल भी नहीं मिली पर्याप्त जगह, 25 वर्षों से बिना लाइसेंस मातृ ब्लड बैंक का संचालन”” के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया. जिलाधिकारी विवेक कुमार मैत्रेय के ठोस प्रयास से अब मॉडल अस्पताल के नये भवन में ब्लड बैंक संचालन के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध करा दी गयी है. मंगलवार को सदर अस्पताल के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने चौथे तल के एक बड़े हिस्से में रखे पूर्व हिंदुस्तान लैब के सामान का जायजा लिया. निरीक्षण के क्रम में उन्होंने उक्त सामान की वस्तुसूची तैयार कर किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर हस्तांतरित करने का निर्देश सिविल सर्जन को दिया. साथ ही यह स्पष्ट किया कि खाली होने वाले कक्ष को मातृ ब्लड बैंक के लिए स्थायी रूप से उपलब्ध कराया जाये. जिलाधिकारी के आदेश के अनुपालन में सिविल सर्जन डॉ श्रीनिवास प्रसाद ने चिकित्सा पदाधिकारियों एवं कर्मियों की एक विशेष टीम का गठन किया. इस टीम को पूर्व हिंदुस्तान लैब से जुड़े समस्त उपकरणों व सामग्री की सूची बनाकर उन्हें सुरक्षित कक्ष में स्थानांतरित करने तथा संबंधित कक्ष को पूरी तरह खाली कराने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. गठित दल में डॉ आलोक कुमार सिन्हा, डॉ अनूप कुमार दुबे तथा सदर अस्पताल के लिपिक सिद्धी कुमार शामिल हैं. गौरतलब है कि सदर अस्पताल स्थित मातृ ब्लड बैंक वर्ष 2001 से ही बिना लाइसेंस के संचालित हो रहा है. वर्ष 2025 में मॉडल अस्पताल भवन में इलाज शुरू होने के बाद उम्मीद जगी थी कि ब्लड बैंक को मानक के अनुरूप जगह मिलेगी और वर्षों से लंबित लाइसेंस प्रक्रिया को गति मिलेगी. लेकिन एक वर्ष बीतने के बावजूद पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं हो सकी थी. सूत्रों के अनुसार, राज्य स्तर से पिछले करीब छह माह से लगातार दबाव बनाया जा रहा था. जगह की कमी के कारण अत्यंत आवश्यक कंपोनेंट मशीन भी नहीं लग पायी थी, जिससे मरीजों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था. अब जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से जब ब्लड बैंक के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित हो गयी है, तो उम्मीद है कि लाइसेंस की लंबित प्रक्रिया जल्द पूरी होगी और कंपोनेंट मशीन शीघ्र स्थापित की जायेगी. इससे न केवल रक्त की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि गंभीर मरीजों को समय पर सुरक्षित रक्त एवं उसके घटक भी उपलब्ध हो सकेंगे.

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