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सीवान व महाराजगंज में खुलेगा फ्रेश कैच कियोस्क

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सीवान व महाराजगंज में खुलेगा फ्रेश कैच कियोस्क
सांकेतिक तस्वीर

प्रतिनिधि, सीवान. जिले में मछली प्रेमियों और स्थानीय मछली पालकों के लिए एक बड़ी सौगात आने वाली है. अब ताजी और जिंदा मछली खरीदने के लिए लोगों को गंदगी और अव्यवस्था वाले पारंपरिक बाजारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. पहली बार आधुनिक सुविधाओं से लैस ‘फ्रेश कैच कियोस्क’ (फिश आउटलेट) खोले जाएंगे. मत्स्य निदेशालय ने इस योजना को स्वीकृति दे दी है. फिलहाल नगर परिषद क्षेत्र सीवान में दो तथा महाराजगंज नगर पंचायत क्षेत्र में एक कियोस्क खोलने की योजना है. जिला मत्स्य विभाग को इसी माह उपयुक्त स्थान चिह्नित कर प्रस्ताव भेजने का निर्देश मिला है. सार्वजनिक हाट-बाजार, पुलिस लाइन, रेलवे कॉलोनी और बस स्टैंड के आसपास की जमीनों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि आम लोगों को आसानी से ताजी मछली उपलब्ध हो सके. फ्रेश कैच कियोस्क एक प्री-फैब्रिकेटेड आधुनिक आउटलेट होगा,मछलियों को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए डीप फ्रीजर, डिस्प्ले यूनिट और आइस बॉक्स लगाए जाएंगे. मछलियों को काटने, साफ करने और पैक करने के लिए आधुनिक मशीनों की व्यवस्था होगी. सबसे खास बात यह होगी कि यहां जिंदा मछलियों को सुरक्षित रखने की वैज्ञानिक व्यवस्था होगी, मछली पालकों को मिलेगा सीधा बाजार- इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय मछली पालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है. अक्सर मछली पालकों को अपनी उपज बिचौलियों के हाथ औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ती है, जिससे उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता.फ्रेश कैच कियोस्क के माध्यम से वे सीधे ग्राहकों तक अपनी मछली पहुंचा सकेंगे.इससे उनकी आमदनी में वृद्धि होगी और मुनाफा भी बढ़ेगा.यह योजना स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बनेगा. कियोस्क संचालन, प्रबंधन और बिक्री से जुड़े कार्यों में युवाओं को जोड़ा जाएगा. बोले अधिकारी- जिले में पहली बार तीन फ्रेश कैच कियोस्क खोलने की स्वीकृति मिली है. नगर निकायों के साथ समन्वय कर भूमि चयन की प्रक्रिया जारी है. उन्होंने कहा कि यह पहल मछली पालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराएगी और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ेगी. सीवान शहर में दो और महाराजगंज में एक ‘फ्रेश कैच कियोस्क’ खुलेगा. चंदन कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी, सीवान जिले में मछलीपालकों समूह बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में,अब खुद करेंगे कारोबार सीवान.जिले के मछलीपालक अब सिर्फ पालक नहीं, बल्कि कारोबारी बनेंगे. वे खुद की कंपनी चलायेंगे और अपनी शर्तों पर मछली बेचेंगे.जिले में पहली बार फिश फार्मर प्रोड्यूसर ग्रुप यानी एफएफपीजी बनाने की कवायद शुरू हो गई है और प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है.इसका मुख्य उद्देश्य मत्स्यपालकों को एकजुट करना और उन्हें बिचौलियों की चंगुल से मुक्त कराना है.समूह बनाने के लिए विभाग ने कवायद भी तेज कर दी है. जिला मत्स्य पदाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि इस ग्रुप का रजिस्ट्रेशन कंपनी एक्ट के तहत कराया जाएगा. समूह बनने से मछली उत्पादकों को बड़े फायदे होंगे.जब 200-500 किसान मिलकर एक साथ मछली का दाना, दवा और जाल खरीदेंगे, तो कंपनियों से मोलभाव कर सकेंगे.डीएफओ ने बताया कि थोक में खरीदारी करने से सामान सस्ता मिलेगा, जिससे मछली पालन की लागत घटेगी. अकेला किसान मंडियों में मछली नहीं बेच पाता, लेकिन ग्रुप बनने के बाद वे ब्रांड नाम से अपनी मछली सीधे बड़े व्यापारियों, होटलों या दूसरे राज्यों में भेज सकेंगे. इससे बिचौलियों का कमीशन बचेगा और मुनाफा किसान की जेब में जाएगा. इसके अलावा, बैंक किसी एक किसान को लोन देने में आनाकानी कर सकता है, लेकिन जब रजिस्टर्ड कंपनी यानी ग्रुप लोन मांगती है, तो प्रक्रिया आसान हो जाती है. सरकार से मिलने वाले अनुदान और इन्फ्रास्ट्रक्चर अर्थात गाड़ी, आइस प्लांट आदि का लाभ लेना भी आसान हो जाएगा.

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