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Home बिहार सीवान दाहा नदी में बहाया जा रहा है 16 मिलियन लीटर गंदा पानी

दाहा नदी में बहाया जा रहा है 16 मिलियन लीटर गंदा पानी

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दाहा नदी में बहाया जा रहा है 16 मिलियन लीटर गंदा पानी
सांकेतिक तस्वीर

जितेंद्र उपाध्याय,सीवान. दाहा नदी के अस्तित्व को बचाने की चर्चाओं के बीच एक कड़वा सच यह भी है कि इसके प्रदूषण के लिए आम नागरिक भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार हैं. एक अनुमान के मुताबिक, सीवान शहर के घरों से निकलने वाला औसतन 16 मिलियन लीटर (1 करोड़ 60 लाख लीटर) से अधिक गंदा पानी प्रतिदिन नालों के जरिए सीधे नदी में समा रहा है. शहर का बोझ और प्रदूषित होते मुहाने सीवान शहर दाहा नदी के मुहाने पर बसा है, जहां की दो लाख से अधिक आबादी इस नदी से किसी न किसी रूप में जुड़ी है. नगर परिषद के सर्वे के अनुसार, शहर के 45 वार्डों में स्थित लगभग 30 हजार आवासीय और गैर-आवासीय भवनों का कचरा, छोटे प्लांटों, नर्सिंग होम और अस्पतालों का अपशिष्ट शहर के सात मुख्य नालों के माध्यम से बिना किसी शोधन के नदी में बहाया जा रहा है. जलीय जीवन और जन-स्वास्थ्य पर खतरा सीवर और नालियों के गंदे पानी ने नदी के जल को इतना प्रदूषित कर दिया है कि वह अब बदबूदार हो चुका है. इसका सीधा दुष्प्रभाव जलीय जीवों पर पड़ रहा है. साथ ही, नदी किनारे रहने वाली आबादी के स्वास्थ्य के लिए भी यह एक गंभीर खतरा बन गया है. विशेषज्ञों की मानें तो यदि जल्द ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था नहीं की गई, तो कृषि, पशुपालन और पेयजल स्रोत पूरी तरह नष्ट हो सकते हैं. दाहा नदी को प्रदूषित करने वाले मुख्य कारक घरेलू अपशिष्टशौचालयों का मल-जल और घरों का गंदा पानी बिना शोधन के गिरना औद्योगिक अपशिष्टछोटी-बड़ी फैक्ट्रियों से निकलने वाला रासायनिक पानी .कृषि रसायनखेतों में इस्तेमाल होने वाले खाद और कीटनाशक, जो बारिश के साथ नदी में मिलते हैं. ठोस कचरा प्लास्टिक, पॉलिथीन और बाजारों का कचरा नदी में फेंकना. धार्मिक/सामाजिक गतिविधियांमूर्ति विसर्जन, पूजा सामग्री, और श्मशान घाटों के अवशेष. अतिक्रमणनदी तटों पर निर्माण और मलबे के कारण प्राकृतिक बहाव का बाधित होना. समय की मांग नदी को ””सेप्टिक टैंक”” बनने से रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर ठोस योजना की आवश्यकता है. बिना उपचारित पानी को नदी में बहाने पर तत्काल रोक लगाना और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण करना ही एकमात्र विकल्प बचा है. नदी किनारे बसे गांवों और बाजारों के कचरा प्रबंधन पर भी ध्यान देना अनिवार्य है. .

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