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गुठनी प्रखंड में 12 पंचायतें, पर एक भी दमकल गाड़ी नहीं

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गुठनी प्रखंड में 12 पंचायतें, पर एक भी दमकल गाड़ी नहीं

गुठनी (सीवान). प्रखंड मुख्यालय समेत आसपास के गांवों में हजारों की आबादी के बीच एक भी फायर स्टेशन नहीं है. माह मार्च के अंत तक व अप्रैल माह शुरू होते ही प्रखंड मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक कई जगह भीषण अगलगी की घटना हो चुकी है, जिसमें गरीब परिवार का सबकुछ जलकर खाक हो चुका है. इन दिनों प्रचंड गर्मी पड़ रही है. ऐसे में अगर तपती धूप में कहीं थोड़ी सी भी चूक हुई, तो एक चिनगारी गरीबों के आशियाने को जलाकर खाक कर देती है. अगर कहीं आग लगती है तो लोग सबसे पहले आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड को सूचना देते हैं. लेकिन ताज्जुब की बात है कि प्रखंड मुख्यालय में अग्निशमन की एक भी गाड़ी नहीं है. अग्निशमन की गाड़ी नहीं रहने से अगलगी की घटना होने से परेशानी बढ़ जाती है, जिसके कारण लोगों का सबकुछ जलकर स्वाहा हो जाता है. प्रखंड में एक भी अग्निशमन विभाग की गाड़ी नहीं रहने से जब तक अनुमंडल मुख्यालय से सूचना पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंचती है, तब तक सब कुछ जल कर खाक हो जाता है. ताज्जुब की बात है कि प्रखंड मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में अगर अगलगी की घटना होती है, तो तुरंत काबू नहीं पाया जा सकता है, जिसके कारण अधिकांश मामलों में आग जब गरीबों के आशियाने व सब कुछ स्वाहा कर चुकी होती है तब फायर ब्रिगेड की गाड़ी सिर्फ राख को ठंडा करने पहुंचती है. वहीं साधन के अभाव में कहीं मुख्यालय से दूर सोहगरा, डरैला, सेमाटार, चिलमरवा, ताली समेत दर्जनों ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं बड़ी आगजनी की घटना हो जाये, तो फिर उस पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है. प्रखंड क्षेत्र की 12 पंचायतों में अग्निशमन की व्यवस्था नहीं है. अगलगी की घटना पर मैरवा अनुमंडल मुख्यालय से दमकल की गाड़ी पहुंचती है. दूरी ज्यादा होने की वजह से घटनास्थल पर दमकल पहुंचने में काफी वक्त लग जाता है. तब तक सब कुछ स्वाहा हो जाता है. इसको लेकर गांव में अग्निशमन वाहन और कर्मी की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन इस दिशा में आज तक कोई पहल नहीं की गयी है. मार्च से लेकर जून तक आग लगने की घटना ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर होती है. जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मैरवा अनुमंडल मुख्यालय से आग पर नियंत्रण करना आसान काम नहीं होता है. आग की एक साथ कई घटनाएं होती हैं तो विभाग को काफी दिक्कत हो जाती है. बाहर से गाड़ियां मंगा कर काम चलाया जाता है. इससे देर हो जाने पर काफी नुकसान हो जाता है. सुरक्षा की दृष्टि से स्कूलों, रसोई, पेट्रोल टंकी, प्रतिष्ठान, नर्सिंग होम, हॉस्पिटल व बड़ी इमारतों में अग्निशमन यंत्र लगाने के निर्देश है. लेकिन अग्निशमन विभाग की शिथिलता के चलते अधिकतर प्रतिष्ठान व उचित मूल्य की दुकानें व स्कूलों में भी अभी तक अग्निशमन यंत्र ही नहीं लगवाये गये हैं. इससे हर समय अगलगी का खतरा मंडराता रहता है. इधर, सीओ डॉ विकास कुमार ने बताया जिला मुख्यालय को अग्निशमन वाहन के लिए पत्र लिखा गया है. आग लगने पर मैरवा अनुमंडल से वाहन मंगाना पड़ता है.

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