सीतामढ़ी से रतिकांत झा की रिपोर्ट
Sitamarhi News: बिहार में सहायक प्रोफेसर बहाली की नई नियमावली 2026 के विरोध में रविवार को सीतामढ़ी में NET, JRF और PHD धारकों की बैठक हुई. अभ्यर्थियों ने नियमावली को यूजीसी मानकों के विपरीत बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा.
नई नियमावली को बताया शिक्षा और युवा विरोधी
नगर स्थित श्री राधा कृष्ण गोयनका कॉलेज मैदान में आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में NET, JRF और PHD धारक शामिल हुए. वक्ताओं ने सहायक प्रोफेसर बहाली की नई नियमावली 2026 को “काला ड्राफ्ट” बताते हुए कहा कि यह उच्च शिक्षा और युवाओं के हितों के खिलाफ है. उनका आरोप था कि नियमावली तैयार करते समय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के मानकों की अनदेखी की गई है.
आयु सीमा घटाने पर जताई नाराजगी
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. राजीव कुमार काजू ने कहा कि वर्षों से बहाली का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को राहत देने के बजाय आयु सीमा घटाकर उनके भविष्य के साथ अन्याय किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार को अभ्यर्थियों की समस्याओं को समझते हुए नियमावली में संशोधन करना चाहिए.
UGC 2018 नियमावली लागू करने की मांग
डॉ. अमरनाथ सिंह, डॉ. धीरज मिश्रा और डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि नई नियमावली में एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर (API) का निर्धारण संतुलित नहीं है. उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वर्ष 2018 की मूल नियमावली को लागू किया जाए, ताकि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो सके.
55 वर्ष आयु सीमा और अन्य संशोधन की मांग
बैठक में शामिल अभ्यर्थियों ने NET, JRF और PHD धारकों के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष निर्धारित करने की मांग की. इसके साथ ही नई नियमावली में आवश्यक संशोधन कर योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने की अपील सरकार से की गई.
मांगें नहीं मानी गईं तो होगा चरणबद्ध आंदोलन
बैठक में मौजूद अभ्यर्थियों ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने नई नियमावली में आवश्यक बदलाव नहीं किए तो पूरे राज्य में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा. हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार वार्ता के माध्यम से इस मामले का समाधान निकालेगी और योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करेगी.
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