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निजी क्लिनिक खोलकर नहीं करें सरकारी ड्यूटी : सिविल सर्जन

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निजी क्लिनिक खोलकर नहीं करें सरकारी ड्यूटी : सिविल सर्जन

सीतामढ़ी. सदर अस्पताल के करीब तीन चिकित्सकों के ड्यूटी से नदारद रहने को सीएस डॉ सुरेश प्रसाद ने गंभीरता से लिया है. 21 अक्टूबर को सदर अस्पताल के औचक निरीक्षण में सीएस ने 34 चिकित्सक समेत 127 कर्मियों को नदारद पाया था. यानी इनमें से कुछ को छोड़कर अधिकांश बिना अवकाश के अनुपस्थित मिले थे. इसको लेकर सीएस डॉ प्रसाद ने अनुपस्थित अवधि के वेतन भुगतान पर रोक लगाने के साथ ही स्पष्टीकरण भी पूछा है. निरीक्षण के बाद से सीएस एक तरह से पूरे फॉर्म में है. उनकी नजरे उन सरकारी चिकित्सकों पर टेढ़ी हो गई है, जो निजी क्लिनिक का संचालन करते है. — सरकारी ड्यूटी से करते है परहेज

गौरतलब है कि अधिकांश सरकारी चिकित्सकों का निजी क्लिनिक/नर्सिंग होम है. अगर खुद का नहीं है कि किसी दूसरे नर्सिंग होम में पार्ट टाइम वर्क करते है. यहां काम करने से चिकित्सकों को मोटी कमाई होती है. यानी सरकारी चिकित्सक दोहरी कमाई करते है. एक ओर जहां सरकारी वेतन मिलता है, तो दूसरी ओर निजी क्लिनिक/नर्सिंग होम से अच्छी आय करते है. इस दौरान अधिकांश चिकित्सक यह भूल जाते है कि उनकी पहली ड्यूटी सरकारी चिकित्सक के रूप में जनता की सेवा करनी है. निजी क्लिनिक के चलते ये सरकारी चिकित्सक सरकारी अस्पताल में काफी कम समय देते है. यानी कम ड्यूटी करते है.

— सीएस ने सच्चाई किया है स्वीकार

निजी क्लिनिक/नर्सिंग होम/अल्ट्रासाउंड/जांच घरों को संचालित करने वाले चिकित्सक सरकारी ड्यूटी करने से परहेज करते है. इस सच्चाई को खुद सीएस डॉ प्रसाद ने भी स्वीकार किया है. सूत्रों ने बताया कि निरीक्षण में नदारद मिले करीब तीन दर्जन चिकित्सकों के मामले में सीएस ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है. संभवत: इसी कारण उन्होंने डुमरा पीएचसी प्रभारी से सदर अस्पताल के उन चिकित्सकों की सूची दो दिनों के अंदर मांगी है, जो जिनका डुमरा प्रखंड के विभिन्न स्थलों पर क्लिनिक/नर्सिंग होम/जांच घर/अल्ट्रासाउंड आदि का संचालन कर रहे है. चिकित्सक के पूर्ण पता के साथ जानकारी मांगी गई है. सीएस डॉ प्रसाद ने बताया कि जिन चिकित्सक को नन प्रैक्टिस भत्ता नहीं मिलता है, वो निजी क्लिनिक संचालित कर सकते है और भत्ता प्राप्त करने वालों पर निजी प्रैक्टिस पर रोक है.

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