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Home बिहार सीतामढ़ी विकास गिरोह का फरमान नहीं मानना बना रामजी के मौत का कारण

विकास गिरोह का फरमान नहीं मानना बना रामजी के मौत का कारण

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विकास गिरोह का फरमान नहीं मानना बना रामजी के मौत का कारण

अमिताभ कुमार सीतामढ़ी. जिला मुख्यालय से सटे तलखापुर निवासी कातिब नंद किशोर राय की हत्या के बाद गैंगस्टर रामजी राय हत्याकांड से तिहाड़ जेल का कनेक्शन सामने आया है. तिहाड़ जेल से कनेक्शन मतलब, सीतामढ़ी में दहशत फैला कर अपराध की दुनिया में राज करते रहे विकास झा उर्फ कालिया का.

–जांच में दो दिन से दानापुर पुलिस बहा रही पसीना

रामजी राय हत्याकांड में मामले की जांच शनिवार से लेकर रविवार तक दानापुर पुलिस ने की. वह सबसे पहले डुमरा थाने पहुंची. वहां की पुलिस ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से रामजी राय व विकास झा के गिरोह की बारीकी से जानकारी ली. खासतौर पर विकास झा गिरोह की सक्रियता की जानकारी ली. इस दौरान दानापुर पुलिस रामजी के घर पहुंचकर परिजनों से बातचीत की.

–स्थानीय व्यक्ति पर पुलिस की नजर

पुलिस सूत्रों पर भरोसा करें तो दानापुर पुलिस के जांच में यह सामने आया है कि रामजी राय की हत्या में स्थानीय किसी व्यक्ति ने लाइनर का काम किया है, जो रामजी राय की रेकी कर रहा था. हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए खासतौर पर पुलिस रेकी करने वाले की पहचान करने में जुटी है.

–शादी के बाद मुख्य धारा में शामिल होना चाहता था रामजी

डुमरा थाना अंतर्गत विश्वनाथपुर गांव निवासी रामजी राय के ग्रामीण किसी झमेला में नहीं पड़ने के कारण नाम नही छापने की शर्त पर बताते है कि नंद किशोर राय हत्याकांड में जमानत पर बाहर आने के बाद रामजी राय का अधिकांश समय घर में गुजरता था. इसी बीच जनवरी 2021 में उसकी शादी हो गयी. शादी के बाद उसने मन बना लिया था कि वह अपराध की दुनिया छोड़कर समाज के मुुख्य घारा मेंं शामिल होने का प्रयास करेगा. इसी कारण जीविकोपार्जन के लिए उसने ठेकेदारी का मन बना लिया था.

–सरकारी ठेकेदारी पर विकास गिरोह का वर्चस्व

इधर, चर्चा है कि सरकार की विभिन्न योजना को लेकर निकलने वाले निविदा का टेंडर विकास झा गिरोह की बागडोर संभाल रहे एक व्यक्ति की अनुमति के बिना स्थानीय कोई संवेदक डालने का दुस्साहस नही करते है. कहा जाता है कि किसी भी योजना का टेंडर भरने के लिए एक निश्चित रकम गिरोह का संचालन कर रहे एक खास व्यक्ति के पास जमा करना पड़ता है. बदले में दूसरे संवेदक को स्पष्ट तौर पर चेतावनी दे दिया जाता था कि उस टेंडर की निविदा कोई दूसरा नही डालेगा. दबी जुबान से संवेदकों के बीच कहा जा रहा है कि ठेकेदारी में चल रहे विकास झा गिरोह के वर्चस्व का मानने से रामजी राय ने इंकार कर दिया था. यही कारण है कि तकरीबन एक माह से दोनों गिरोह के बीच तानातानी की स्थिति बनी हुई थी. सामने वाले की नियत भांप कर रामजी राय भी अटैकिंग मूड में आकर कुछ दिन के लिए पटना में अंडर ग्राउंड होकर आगे की रणनीति तैयार कर रहा था. इसी बीच रेकी करने से सूचना मिलने पर रामजी राय की हत्या कर दी गयी.

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–विकास व रामजी ने मिलकर दिया था नंद किशोर हत्याकांड को अंजाम

हालांकि इससे पूर्व 2021 के जून माह में कातिब नंद किशोर राय की हत्या में विकास झा और रामजी राय का नाम एक साथ आया था. पुलिस ने यह खुलासा किया था कि कांटा चौक के समीप तकरीबन चार करोड़ की एक जमीन को हथियाने के लिए विकास झा और रामजी राय ने हाथ मिला लिया था. उस वक्त पुलिसिया जांच में यह सामने आया था कि नंद किशोर की हत्या की घटना को अंजाम देने के लिए विकास से मिलने के बाद रामजी राय तिहाड़ जेल गया था.

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— दिल्ली में मौजूद विकास के आदमी ने शुटर से किया था संपर्क

बताया जाता है कि दिल्ली में मौजूद विकास झा के खास व्यक्ति के माध्यम से रामजी राय का शुभम नामक एक व्यक्ति से संपर्क कराया गया, जिसने नंद किशोर की हत्या करने के लिए हथियार मुहैया कराया था. हत्या से पांच दिन पूर्व से शूटर समेत अन्य अपराधी नंद किशोर के घर से लेकर रजिस्ट्री ऑफिस तक की रेकी कर रहा था. लाइनर ने ही शुटर को उसकी पहचान भी करायी थी. विकास झा ने ही शुटर को अपाचे बाइक के साथ मोबाइल भी दिलवाया था. पुलिस के समक्ष स्वीकारोक्ति में शुटर ने बताया था कि वह रामजी राय का सिर्फ नाम जानता था, चेहरे से नहीं पहचानता था. घटना के बाद रामजी शूटर को सही सलामत स्थिति में पहुंचाने का जिम्मा लिया था. हत्या को अंजाम देने के बाद शूटर ने अपना बाल छोटा करवा लिया था, ताकि उसकी पहचान उजागर नहीं हो सके. यहां तक कि गोली मारने के बाद सभी ने कपड़ा तक बदल लिया था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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