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Home बिहार सासाराम सासाराम में विज्ञान शिक्षकों को मिला नवाचार का मंत्र, दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन

सासाराम में विज्ञान शिक्षकों को मिला नवाचार का मंत्र, दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन

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सासाराम में विज्ञान शिक्षकों को मिला नवाचार का मंत्र, दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन
प्रमाण पत्र लेते हुए

Science Teachers Training Sasaram : सासाराम के फजलगंज स्थित डायट परिसर में आयोजित दो दिवसीय आवासीय विज्ञान प्रशिक्षण कार्यशाला का रविवार को समापन हो गया. कार्यशाला में 11 जिलों से आए 56 विज्ञान शिक्षकों को ऊर्जा संरक्षण, भारतीय ज्ञान प्रणाली और विज्ञान आधारित नवाचारों का प्रशिक्षण दिया गया. समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया.

Sasaram News : ऊर्जा संरक्षण पर दिया गया विशेष जोर

कार्यशाला के दूसरे दिन ‘ऊर्जा के लिए ई-4 : अन्वेषण, प्रयोग एवं संवर्धन’ विषय पर संसाधन व्यक्ति उत्पल कुमार पाण्डेय और जिला समन्वयक विजेंद्र केसरी ने विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भारत सहित पूरी दुनिया ऊर्जा संकट की चुनौती का सामना कर रही है. ऐसे में ऊर्जा संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है.

उन्होंने बताया कि जल संरक्षण, जल संवर्धन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर आधारित विज्ञान परियोजनाएं तैयार कर छात्रों में वैज्ञानिक सोच विकसित की जा सकती है. साथ ही सतत विकास के लक्ष्य को हासिल करने में ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका है.

Rohtas News : भारतीय ज्ञान प्रणाली को विज्ञान से जोड़ने पर चर्चा

‘निरंतरता के लिए भारतीय ज्ञान प्रणालियों का अनुप्रयोग’ विषय पर व्याख्यान देते हुए डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने भारतीय आयुर्वेद की वैज्ञानिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में समृद्ध खाद्य संस्कृति, औषधीय पौधों और आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों पर आधारित कई शोध और विज्ञान परियोजनाओं की व्यापक संभावनाएं हैं.

उन्होंने शिक्षकों से भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक विज्ञान से जोड़कर विद्यार्थियों में अनुसंधान और नवाचार की भावना विकसित करने का आह्वान किया.

56 शिक्षकों को मिला प्रशिक्षण प्रमाण पत्र

समापन समारोह में 11 जिलों से आए 56 विज्ञान शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम के अंत में आलोक कुमार मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

स्कूलों में प्रयोगधर्मी विज्ञान शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

कार्यशाला में शामिल शिक्षकों ने कहा कि यहां प्राप्त ज्ञान और प्रयोगात्मक अनुभव का उपयोग वे अपने-अपने विद्यालयों में विज्ञान शिक्षण को अधिक रोचक, प्रयोगधर्मी और नवाचार आधारित बनाने में करेंगे. उनका मानना है कि इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होगा और विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी.

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