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Home बिहार सासाराम कमीशन के लिए मेयर शहर को कर रही हैं बर्बाद : डिप्टी मेयर

कमीशन के लिए मेयर शहर को कर रही हैं बर्बाद : डिप्टी मेयर

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कमीशन के लिए मेयर शहर को कर रही हैं बर्बाद : डिप्टी मेयर

सासाराम नगर. नगर निगम में कमीशन का खेल शुरू हो गया है, जिनको मिल रहा है, वह चुप हैं, जिनके हाथ नहीं लग रहा, वह शोर मचा रहे हैं. ये बातें शुक्रवार को वार्ड संख्या-13 की पार्षद सुनीता सिंह के घर पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में डिप्टी मेयर सत्यवंती देवी ने कहीं. उन्होंने कहा कि कमीशन के लिए मेयर काजल कुमारी नगर आयुक्त पर दबाव बना रही हैं. मेयर जिन 36 योजनाओं को लेकर सवाल खड़ा कर रही हैं, वे सभी योजनाएं निगम क्षेत्र में ही की जा रही हैं. इन पर 1.66 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. यह सही है. इनमें से उन्हें (मेयर) कमीशन नहीं मिल रहा है, इसलिए लोगों को गुमराह करने के लिए नगर आयुक्त को बदनाम कर रही हैं. साथ ही और भी ऐसे कार्य हैं, जिनका कार्यादेश मेयर ने रद्द नहीं किया है, क्योंकि उन कार्यों को शुरू होने से पहले ही उन्हें कमीशन मिल गया था. जिन कार्यों से उन्हें कमीशन नहीं मिला, उन कार्यों का कार्यादेश रद्द करने का उन्होंने पत्र लिखा है.

वार्ड संख्या-17 की पार्षद सुकांति देवी ने कहा कि नगर निगम भवन में स्थित मेयर के कार्यालय में उनकी अनुपस्थिति में उनके परिवार के लोग कार्यालय को चलाते हैं. इसी कार्यालय में जन्मदिन भी मनाया जाता है. साथ ही मेयर के घर पर निगम के संवेदकों का बैठक कराकर टेंडर मैनेज कराया जाता है और निर्धारित दर पर टेंडर डालकर उनसे कमीशन लिया जाता है. वहीं, वार्ड 44 की पार्षद केला देवी के प्रतिनिधि सरोज कुमार गुप्ता, वार्ड संख्या-9 की पार्षद दशमातो देवी के प्रतिनिधि अमित कुमार, वार्ड संख्या-40 की पार्षद किरण जायसवाल के प्रतिनिधि आनंद जायसवाल, पूर्व डिप्टी चेयरमैन चंद्रशेखर सिंह, कुलबुल सिंह, प्रवीण सिंह, पूर्व पार्षद अतेंद्र सिंह, पार्षद गुलशन अफरोज, वार्ड संख्या-23 के पार्षद राजेश कुमार गुप्ता उर्फ मंटू, संजय वैश्य व अन्य मौजूद थे.

शहरवासियों पर जबरन थोपा गया एक प्रतिशत म्यूटेशन टैक्स

प्रेसवार्ता में वार्ड 13 की पार्षद सुनीता सिंह ने कहा कि शहरवासियों पर मेयर ने जबरन कई टैक्स थोपे हैं, जिनमें म्यूटेशन के लिए एक प्रतिशत टैक्स शामिल है. यह टैक्स पूरे बिहार में किसी भी नगर निकाय में नहीं लिया जाता है. सासाराम नगर निगम इकलौता नगर निकाय है, जहां यह टैक्स मेयर के निर्णय पर लेना शुरू किया गया है. इसका विरोध कई पार्षदों ने किया. लेकिन, सबको दरकिनार कर उनके द्वारा लागू किया गया. साथ ही अपने समर्थन के पार्षदों को अच्छे कमीशन मिलने का आश्वासन भी दिया गया था, जबकि इस नियम को प्रशासकों की समिति ने समाप्त कर दिया था.

18 प्रतिशत जीएसटी का नहीं लिया गया हिसाब

वार्ड 39 के पार्षद संजय कुमार वर्मा ने कहा कि पिछले वर्ष सैरातों की बंदोबस्ती में जीएसटी के साथ बंदोबस्त धारियों को वसूलने का निर्देश दिया गया था. लेकिन, टिकट की दर नहीं बढ़ायी गयी थी. इस नये नियम के तहत बंदोबस्तधारियों ने दो माह तक सैरातों से निर्धारित दर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाकर वसूली की. इसकी शिकायत जब नगर आयुक्त तक पहुंची, तो उन्होंने जीएसटी के बिना वसूली करने का निर्देश दिया. हालांकि, दो माह में बंदोबस्तधारियों से वसूल किये गये जीएसटी का हिसाब न तो मेयर ने मांगा और न ही निगम के अधिकारियों ने दिया. आखिर वह पैसा कहां गया? साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मेयर अपने और सशक्त स्थायी समिति के कार्यालय पर निगम के लाखों रुपये खर्च कर रही हैं, जिसका शहर के विकास से कोई लेना-देना नहीं है. सिर्फ अपने ऐशो आराम और कमीशन के लिए सभी कार्य कर रही हैं.

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