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पशुधन को लू से बचाव के लिए सलाह जारी

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पशुधन को लू से बचाव के लिए सलाह जारी

संझौली. पशुपालन व डेयरी विभाग द्वारा पशुधन को भीषण गर्मी में लू के दुष्प्रभावों से बचाव के लिए सलाह जारी की गयी है. बताया गया है कि तेज गर्म हवाओं का प्रभाव पशुओं की दिनचर्या को भी प्रभावित करता है. इसलिए भीषण गर्मी की स्थिति में पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रबंधन व उपायों जैसे ठंड व छायादार पशु आवास, पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था रखें. लू लगने पर पशु को तेज बुखार, सुस्ती के साथ खाना-पीना बंद करने, सांस की गति व नाड़ी तेज होने, कभी-कभी नाक से खून आने के लक्षण दिखाई देते हैं. पशुपालक द्वारा समय पर ध्यान न देने पर सांस की गति धीरे-धीरे कम होने लगती है तथा पशु चक्कर खाकर बेहोश हो जाता है, जिस कारण मृत्यु की संभावना होती है. पशु वैज्ञानिक डॉक्टर आलोक भारती कहते हैं कि लू से बचाव के लिए पशुपालकों को पशु आवास के लिए निर्मित मकानों की छत को गर्म होने से रोकने के लिए सूखी घास व जामुन के पत्ते रखना चाहिए. गर्म हवाओं का सीधा प्रवाह रोकने के लिए लकड़ी की ताट्टी, फटे बोरा-बोरी की टाट को गीला करके लगाना चाहिए, जिससे पशु आवास में ठंडक बनी रहे. पशु आवास गृह में आवश्यकता से अधिक पशुओं को न बांधे, रात्रि में पशुओं को खुले स्थान में बांधे. इसके अलावा पशु आवास का अभाव होने पर पशुओं को छायादार पेड़ के नीचे बांधे. पशुओं को हरा चारा अधिक मात्रा में खिलाए, हारे चारे में 70 से 90 प्रतिशत जल की मात्रा होती है. इससे पशुओं की जलापूर्ति भी हो जाती है. बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क कर, पशु का उपचार कराये. जिससे पशुधन तथा उत्पादन में होने वाली हानि से बचा जा सके.

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