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Home बिहार सासाराम पुस्तकों को ट्रंक में बंद करना जिले के दो प्रिंसिपलों को पड़ा महंगा, निलंबित

पुस्तकों को ट्रंक में बंद करना जिले के दो प्रिंसिपलों को पड़ा महंगा, निलंबित

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पुस्तकों को ट्रंक में बंद करना जिले के दो प्रिंसिपलों को पड़ा महंगा, निलंबित

सासाराम नगर. विद्यालयों का निरीक्षण न हो, तो सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को न तो बेहतर शिक्षा और न ही बेहतर सुविधा मिल पायेगी. इसका खुलासा राज्य परियोजना निदेशक, बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के निरीक्षण में हुआ है. जिले के दो स्कूलों के प्रिंसिपल को कार्य में लापरवाही को लेकर निलंबित कर उनपर विभागीय कार्रवाई शुरू हो गयी है. अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान पाया कि इन प्रिंसिपलों ने बच्चों के बीच वितरीत करने के लिए भेजे गये पुस्तकों को ट्रंक में बंद कर रखा है. मठिया उत्क्रमित मध्य विद्यालय के औचक निरीक्षण के दौरान पाया गया कि प्रिंसिपल नन्द कुमार ने ट्रंक में 138 सेट पुस्तकों को बंदकर के रखा है, जिससे बच्चों को पठन-पाठन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. साथ ही यह कार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है. ऐसे में उनसे जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्टीकरण मांगा था. लेकिन, तय अवधी तक उनके द्वारा कोई जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ बिहार कर्मचारी आचार नियमावली के तहत आरोप गठित कर निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गयी है. साथ ही यह आदेश भी दिया गया है कि निलंबन अवधि तक नन्द कुमार का मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय नोखा होगा.

कस्तर के प्रिंसिपल ने पन्नों पर ली परीक्षा

कस्तर मध्य विद्यालय के प्रिंसिपल राजेश कुमार सिंह मठिया के प्रिंसिपल से दो कदम आगे चलते हुए. बच्चों का मासिक परीक्षा पन्ने पर ही ले लिये हैं. साथ ही पुस्तकों का 41 सेट अपने विद्यालय में रखे हुए थे. जबकि नये सेशन का दो माह बीत चुका है. निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया है कि इनके स्कूल में बच्चों की डायरी संधारित नहीं किया गया है. वहीं बच्चों को उपलब्ध कराये गये गृह कार्य का जांच शिक्षकों से सही ढंग से नहीं कराना. साथ ही साप्ताहिक परीक्षा को लेकर कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराना, जिससे यह दर्शाता है कि स्कूल के प्रिंसिपल कार्य के प्रति शिथिल, कर्तव्य के प्रति उदासीन हैं, जो साफ तौर पर शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है. इन आरोपों को लेकर प्रिंसिपल से स्पष्टीकरण मांगा गया था. लेकिन, तय तिथि तक वह जवाब नहीं दिये, जिसको लेकर उनको निलंबित करते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गयी है. साथ ही निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय काराकाट निर्धारित किया गया है.

रद्दी के भाव में बेचने की थी तैयारी

नये सेशन के दो माह बीत जाने के बाद भी पुस्तकों को वितरित नहीं करना माना जा सकता है कि इसे रद्दी में बेचने की तैयारी चल रही थी. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रतिवर्ष सरकारी स्कूलों के किताब रद्दी के भाव में बेचे जाते हैं. पूरे जिले को अगर देखेंगे, तो इनका वजन टनों में हो सकता है. इसलिए आप अक्सर कागज के बने दोनों में मूंगफली खाते वक्त इन किताबों के पन्नों को देख सकते हैं, जिसपर कविताएं लिखी होती हैं. रद्दी का भाव दिन पर दिन बढ़ते जा रहा है. बाजार में फिलहाल रद्दी हो चुके अखबारों की कीमत करीब 20 रुपये प्रति किलोग्राम है. ऐसे में प्रिंसिपल इन किताबों को रद्दी बनाने के प्रयास में जुटे हो सकते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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