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Home बिहार सासाराम आम के टिकोले को कीड़े पहुंचा रहे नुकसान

आम के टिकोले को कीड़े पहुंचा रहे नुकसान

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आम के टिकोले को कीड़े पहुंचा रहे नुकसान

सासाराम ऑफिस़ आम के मंजर में टिकोले लग चुके हैं. कहीं मटर के दाने के बराबर, तो अधिकांश स्थानों पर टिकोले फल होने की ओर बढ़ चले हैं. पर, फल बनने से पहले ही टिकोले पर मिली बग (गुजिया कीट) व मैंगो हॉपर (मधुवा-फुदका कीट) कीट के लगने और बागों में नमी की कमी होने का खतरा भी खड़ा हो चुका है. जानकार बताते हैं कि जहां नमी की कमी से टिकोटे ज्यादा संख्या में गिरने लगते हैं, वहीं कीट आम के फल को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं. अगर, उनका प्रबंधन नहीं किया जाता है, तो पैदावार प्रभावित होता है. गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय जमुहार के तत्वावधान में संचालित नारायण कृषि विज्ञान संस्थान के सहायक प्राध्यापक (फल विज्ञान) डॉ केके मिश्र ने बताया कि समय पर उचित देखभाल नहीं करने से आम के छोटे फल गिरने लगते हैं. ऐसे में पेड़ों की उचित देखभाल करनी चाहिए. उन्होंने गिर रहे टिकोले के संबंध में बताते हुए कहा कि तापमान बढ़ने से आम के बागों में नमी की कमी होती जा रही है. इससे आम के छोटे फल लगातार गिर रहे हैं. फलों को बचाने के लिए किसानों को अपने बागों में पर्याप्त नमी बनाये रखने के साथ ही जरूरी दवाओं का छिड़काव भी करना होगा.

आम के छोटे फलों को गिरने से बचाने के लिए बागों में उपयुक्त वातावरण बनाये रखना होगा. आम के छोटे फलों को गिरने व फटने से बचाने के लिए किसानों को चाहिए कि बागों में उचित नमी बनाये रखें. आम के बाग के पास ईंट के भट्टे और बाग की मिट्टी बलुई होने से मृदा में नमी ज्यादा समय तक नहीं टिकती है. ऐसे में किसानों को चाहिए कि अगर बाग हो, तो बाग की सिंचाई करें. कुछ-कुछ दिनों के अंतराल पर सिंचाई कर मिट्टी में नम बनाये रखने से टिकोले कम गिरेंगे और फल ज्यादा पेड़ पर बचेंगे.

दवा का करें छिड़काव

डॉ मिश्र ने बताया कि आम के टिकोले में लगने वाले कीट फल के रस चूस लेते हैं. इसके कारण टिकोले सूखकर गिर जाते हैं. समय से इनका प्रबंधन नहीं किया गया, तो फिर बड़ी संख्या में टिकोले गिर या सूख जाते हैं. इससे बचाव के लिए जरूरी है कि टिकोले हो जाने के बाद इमिडाक्लोप्रिड (17.8 एसएल) दवा एक मिली प्रति दो लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. इसी तरह हैक्साकोनाजोल एक ग्राम दवा प्रति दो लीटर पानी या डाइनो कैप (46 इसी) दवा एक मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल तैयार कर छिड़काव करना लाभदाय होगा.

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