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दुधारू पशुओं पर गर्मी की मार, सूख रही दूध की धार

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दुधारू पशुओं पर गर्मी की मार, सूख रही दूध की धार

चेनारी. आसमान से बरसती आग से जहां इंसान परेशान हैं, वहीं पशुओं की हालत भी खराब हो रही है. भीषण गर्मी से पशु बेहाल हैं और दुधारू पशुओं ने दूध देना कम कर दिया है. साथ ही पशुओं की परवरिश पर इन दिनों अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जबकि पशु दूध कम दे रहे हैं. गर्मी के मौसम में हरे चारे की दिक्कत है. तब भी किसान महंगा चारा खिला रहे हैं. खल-चोकर पर अधिक पैसा खर्च कर रहे हैं, जबकि दूध उत्पादन गिरता ही जा रहा है. इससे पशुपालक चिंतित हैं. दूध की गिरावट की मार सबसे अधिक उन गरीब पशुपालकों पर पड़ रही है, जिनके परिवार की रोजी-रोटी दूध बिक्री पर ही आधारित है. आसमान से बरसती आग से दूध उत्पादन गिरने लगा है. इससे हजारों रुपये का नुकसान पशुपालकों को हो रहा है.

गर्मी के कारण सेहत पर पड़ रहा असर

तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच गया है. ऐसे में गाय और भैंस 15 से 20 फीसदी तक कम दूध दे रही हैं. दूध का उत्पादन गर्मी में गिर जाने से पशुपालक परेशान हैं, उन पर दोहरी मार पड़ रही है. पशु चिकित्सालयों का कहना है कि सूरज की आग उबलने से पशुओं की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों को एहतियात बरतने की सलाह दी है.

जर्सी गाय के लिए पंखा-कूलर का करना पड़ रहा इंतजाम

भीषण गर्मी से आम लोगों के साथ पशुओं की भी परेशानी बढ़ गयी है. दुधारू पशुओं ने 30 से 50 फीसदी तक दूध देना कम कर दिया है. इतना ही नहीं दुग्ध उत्पादक केंद्र से लेकर दैनिक दूध उपभोक्ताओं को दूध मिलना कम हो गया है. मांग से कम आपूर्ति होने पर दूध की कीमत 25 फीसदी तक बढ़ गयी है. पिछले एक दो महीने से चेनारी प्रखंड में 40 डिग्री सेल्सियस से 43 डिग्री के आसपास गर्मी है. पशु अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित पशु उपचार के लिए पहुंच रहे हैं. इस बीमारी पर शीघ्र काबू नहीं पाया गया, तो पशु की मृत्यु हो सकती है. हॉस्टन फ्रीजियन व जर्सी गाय के दूध का 25 प्रतिशत उत्पादन कम हो गया है. प्रतिदिन 20 लीटर दूध देने वाली गाय 15 लीटर दे रही है. इन नस्लों की गाय गर्मी सहन नहीं कर पा रही और बीमार पड़ने लगी हैं. इस संबंध में नारायणपुर पंचायत के चोरही गांव के दूध दुहने वाले अरविंद पटेल ने बताया कि हम रोज 15 से 20 गाय दुहते हैं, जो 30 फीसदी तक दूध देना कम किया है. दुधारू गायों पर गर्मी का खास असर दिख रहा है. गोरेलाल सिंह ने बताया कि वे गाय-भैंस दोनों पालते हैं. भीषण गर्मी के कारण दो महीने से गायों और भैंसों ने भोजन कम कर दिया है. दूध भी पहले से आधा देने लगी हैं. भैंस का दूध अभी 60 रुपये लीटर के बजाय 70 रुपये और गाय का दूध 45-50 के बजाय 60 रुपये लीटर देना पड़ रहा है. पशुपालक संजय कुमार ने बताया की गौशाला में गायों को सामान्य रखने व गर्मी से बचाने के लिए हमें कूलर व पंखा की व्यवस्था करनी पड़ रही है, जिसका खर्च भी बढ़ गया है. इसके अलावा दिन में दो बार स्नान करवाते हैं. वहीं, पशुओं के निजी डॉक्टर डॉ संजय सिंह ने कहा कि गर्मी के कारण पशु दूध देना कम कर देते हैं. ऐसे में पशुपालकों में जागरूकता फैला रहे हैं कि इस प्रचंड गर्मी को देखते हुए पशुओं के आसपास के वातावरण को ठंडा रखें. मवेशी को टीन के शेड में किसी भी हालत में नहीं रखें. अगर मजबूरन रखना पड़ रहा है तो ध्यान रखें कि टीन का शेड 14 फीट ऊंचा हो और इसके नीचे फूस लगाएं ताकि अत्यधिक गर्मी पशुओं को न लगे. अगर बजट में है तो कूलर आदि लगा उन्हें ठंडा वातावरण प्रदान करें. सुबह व शाम ठंडे पानी से स्नान कराएं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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