डीडी के नाम पर हो पैसों की उगाही हो रही है. मानक के अनुकूल अधिकारी चार्ज कर रहे हैं, लेकिन सरकार को मानक के अनुकूल राजस्व नहीं पहुंच रहा है. सासाराम ग्रामीण. सासाराम अग्निशमन विभाग में एनओसी के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है. विभाग के अधिकारी संस्थान के मालिकों से ऐसे सौदेबाजी कर रहे हैं, जिसके कारण सरकार के राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है. कई ऐसे मामले अब सामने आने लगे हैं. लेकिन, इसका खुलासा तब हो सकता है, जब इसकी वरीय अधिकारियों के द्वारा जांच करायी जायेगी. लेकिन, इस संबंध में जानकारी मांगी जाने पर विभाग कुछ भी बोलने से परहेज कर रहा है. विभाग के अधिकारी इतना ही कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं कि संस्थान के एरिया के अनुपात मुख्यालय के नाम पर डीडी बनता है. इसके बाद कैसे होता है? क्या होता है? इस पर विभाग के कोई भी अधिकारी कुछ नहीं बताते हैं. सासाराम अनुमंडल क्षेत्र के एक नहीं, बल्कि करीब एक सौ से अधिक संस्थानों में यहीं हाल अग्निशमन विभाग के द्वारा किया गया है. जहां मानक के अनुकूल संस्थान से डीडी के नाम पर पैसे लिये गये हैं. लेकिन, डीडी उस संस्थान की लंबाई व चौड़ाई के अनुकूल नहीं बनाया गया है. हालांकि, विभाग के साथ-साथ संस्थान के संचालक भी कुछ नहीं बताते है. क्योकि, ऐसा लगता है कि दोनों तरफ से एक-दूसरे को मना किये हुए हैं. लेकिन, एक संस्थान के संचालक के द्वारा नाम नहीं छपवाने की शर्त पर बताया गया कि सासाराम अग्निशमन विभाग से यदि एनओसी के लिए आवेदन किया जाता है, तो विभाग के अधिकारी लंबा-चौड़ा एस्टीमेट बनाकर आवेदक को थमा देते हैं. इसके बाद उस संस्थान का सत्यापन करते हैं. सत्यापन के बाद ऐसी सेटिंग करते हैं कि सरकार के खाते में न के बराबर व संबंधित अधिकारी की जेब में अधिक ””””माल”””” पहुंच जाता है. इसकी यदि जांच होती, तो बड़ा खुलासा हो सकता है. इस संबंध में सासाराम अनुमंडल अग्निशमन पदाधिकारी नवल किशोर सिंह ने बताया कि किसी भी कॉमर्शियल संस्थान को एनओसी प्राप्त करने के लिए प्रत्येक एक्सवायर मीटर चार रुपये के हिसाब से डीडी बनता है. लेकिन, उनसे जब सवाल हुआ कि अनुमंडल क्षेत्र में कितने संस्थानों के एरिया का ख्याल रखते हुए एनओसी दिया गया है. इस पर वह टाल गये. हकीकत आंकड़े भी नहीं दे सके. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अग्निशमन विभाग में एनओसी में बड़ा खेल का सिलसिला जारी है. वहीं, इस संबंध में अग्निशमन विभाग कमांडेंट रितेश पांडेय से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन बंद मिला.