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जिले के 10 किसानों ने शुरू की चिया सीड्स की खेती

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जिले के 10 किसानों ने शुरू की चिया सीड्स की खेती

संतोष चंद्रकांत, बिक्रमगंज एक बीघा चिया सीड्स की खेती से यदि एक लाख 20 हजार रुपये की आमदनी हो जाये, तो भला कौन किसान धान- गेहूं की पारंपरिक खेती में अपनी मेहनत और पूंजी झोंकना चाहेगा. इसी सोच को हकीकत में बदलने की दिशा में बिक्रमगंज स्थित कृषि विज्ञान केंद्र तेजी से काम कर रहा है. कृषि विज्ञान केंद्र की पहल पर इस वर्ष जिले के 10 किसानों ने सुपरफूड के नाम से मशहूर चिया सीड्स की खेती शुरू की है. यह चिया सीड एक ऐसा प्राकृतिक आहार है, जो कम मात्रा में अधिक पोषण देता है, इसलिए इसे सही मायनों में सुपरफूड कहा जाता है. किसानों को प्रोत्साहन के तौर पर चिया का बीज निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है. बाजार में इसकी कीमत लगभग 600 रुपये प्रति किलो है. कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ रमाकांत सिंह ने बताया कि बिक्रमगंज के खड़ूआ टोला निवासी किसान धर्मेंद्र कुमार ने लगभग डेढ़ बीघे में चिया की खेती की है. और उनकी फसल में अब फूल व दाने बनने लगे हैं. वहीं, सासाराम के धौडाढ़ गांव के किसान सिद्धनाथ पांडेय ने करीब दो एकड़ में इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया है. दोनों किसानों की फसल की बढ़त और विकसित होते दानों को देखते हुए परिणाम उत्साहजनक माने जा रहे हैं. फसल में लगे फूल और हरियाली हर किसी को अपने ओर बुलाती है. 15 से 20 हजार रुपये खर्च कर 1.20 लाख रुपये तक की हो सकती है आमदनी डॉ रमाकांत सिंह बताते है कि प्रति बीघा औसतन दो क्विंटल तक उत्पादन संभव है. मौजूदा बाजार मूल्य 600 रुपये प्रति किलो के हिसाब से एक बीघा से लगभग 1.20 लाख रुपये की आमदनी संभव है. जबकि कुल लागत 15 से 20 हजार रुपये के आसपास रहती है. यानी जोखिम कम, शुद्ध लाभ अधिक. यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है. इस फसल की एक और खासियत किसानों को राहत देती है. चिया के पौधे की महक और स्वाद जंगली जानवरों को रास नहीं आता. इसके कारण नीलगाय, सूअर या अन्य मवेशी फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते. गेहूं, चना और सब्जियों की फसलें अक्सर चरी जाती हैं, जबकि चिया फसल सुरक्षित रहती है. इससे किसानों के नुकसान का खतरा काफी घट जाता है. रोहतास की जलवायु के अनुकूल चिया की खेती कृषि विशेषज्ञ कहते हैं कि चिया की खेती जलवायु के लिहाज से रोहतास जिले के लिए काफी उपयुक्त है. यह फसल कम सिंचाई में तैयार हो जाती है. और सामान्य तापमान व मौसम के उतार–चढ़ाव को भी आसानी से सहन कर लेती है. लगभग 10 किसानों ने इसकी शुरुआत की गयी है. जिले में खेती के नये अध्याय की नींव रखी जा चुकी है. यदि प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले वर्षों में चिया, कम लागत और अधिक आमदनी देने वाली प्रमुख नकदी फसल के रूप में उभर सकती है. दुकानों से लेकर ऑनलाइन तक बढ़ी मांग बिक्रमगंज रसोई मार्ट के प्रोपराइटर सतीश कुमार के अनुसार चिया सीड्स की मांग लगातार बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि “रोहतास के किसान इसकी खेती शुरू कर रहे हैं. यह हमारे जिले के लिए बहुत सुखद संकेत है. चिया सीड्स की मांग वजन नियंत्रण, डाइटिंग, जिम और हेल्थ क्लबों के अलावा सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के बीच भी तेजी से बढ़ रही है. लोग इसे दुकानों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऊंचे दाम पर खरीद रहे हैं. स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से किसानों को सीधा लाभ और युवाओं के लिए नये रोजगार के अवसर बनने की संभावना जतायी जा रही है. सुपरफूड के रूप में चिया सीड की तेजी से बढ़ रही पहचान आयुर्वेद चिकित्सक डॉ अशोक कुमार शर्मा के अनुसार चिया सीड्स वास्तविक अर्थों में ‘सुपरफूड’ हैं. इसमें मौजूद ओमेगा–3 फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर और खनिज तत्व वजन नियंत्रित करने, पाचन सुधारने, हार्ट हेल्थ बेहतर बनाने और ब्लड शुगर संतुलित रखने में सहायक माने जाते हैं. हड्डियों की मजबूती, त्वचा और बालों के स्वास्थ्य के साथ-साथ ऊर्जा और स्टैमिना बढ़ाने में भी चिया का सकारात्मक प्रभाव देखा गया है. रोहतास में शुरू हुई चिया की खेती अभी प्रयोगात्मक दौर में है. लेकिन किसानों के बढ़ते उत्साह और बाजार में इसकी मजबूत मांग यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में यह फसल जिले के किसानों की आमदनी का नया आधार बन सकती है. 1. पोषक तत्वों से भरपूर फाइबर प्रोटीन ओमेगा-3 फैटी एसिड कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम 2. पाचन के लिए फायदेमंद कब्ज दूर करने में सहायक आंतों को स्वस्थ रखता है 3. वजन नियंत्रण में मददगार पेट देर तक भरा रखता है अनावश्यक भूख कम करता है 4. दिल और शुगर के मरीजों के लिए लाभकारी कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है 5. हड्डियों और त्वचा के लिए अच्छा कैल्शियम हड्डियों को मजबूत करता है एंटीऑक्सिडेंट त्वचा को स्वस्थ रखते हैं चिया सीड का सेवन कैसे करें पानी या दूध में भिगोकर दही, सलाद, स्मूदी या जूस में मिलाकर सुबह खाली पेट या नाश्ते के साथ

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