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Home बिहार सारण दारूल उलूम नईमिया में हज पर जाने को लेकर दिया गया प्रशिक्षण

दारूल उलूम नईमिया में हज पर जाने को लेकर दिया गया प्रशिक्षण

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दारूल उलूम नईमिया में हज पर जाने को लेकर दिया गया प्रशिक्षण
सांकेतिक तस्वीर

छपरा. जिला के प्रमुख शिक्षण संस्थान दारूल उलूम नईमिया में मंगलवार को एक दिवसीय हज प्रशिक्षण शिविर का आंयोजन किया गया. शिविर की अध्यक्षता प्राचार्य मौलाना हामिद रजा ने की. शिविर का आगाज कुरआन पाक की तिलावत से हुआ. बिहार राज्य हज कमिटि के निर्देशानुसार आयोजित कैम्प में आजमीन हज को संबोधित करते हुए मुख्य प्रशिक्षक मुफ्ती अली असगर ने कहा कि हज इसलाम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है. हर सक्षम व्यक्ति पर हज करना फर्ज है. अपनी पूरी जिन्दगी में कम से कम एक बार हज जरूर करना चाहिए. हज करने के बाद हाजियों की जिंदगी में महत्वपूर्ण बदलाव आ जाता है. वह गुनाहों से पाक हो जाता है. वह ऐसा हो जाता है जैसे कि अभी-अभी जन्म लिया हो. उन्होंने हज के अरकान पर विस्तृत चर्चा की. सफर के दौरान होने वाली परेशानियों को बताते हुए कहा कि आप अपने साथ कम से कम समान रखें.

हज अल्लाह की रजामंदी के लिए करना चाहिए

उन्होने कहा कि हज अल्लाह की रजामंदी के लिए करना चाहिए. इसके अलावा उन्होेने हज के दौरान मक्का और मदीना शरीफ के विभिन्न जगहों पर गुजारने वाले वक्त पर प्रकाश डाला. अल्हाज फहीम अशरफ खान ने संबोधित करते हुए कहा कि आजीमन हज को ध्यान रखना चाहिए कि उनसे किसी भी तरह से कोई गुनाह न होने पाए. यात्रियों को अपना पहचान पत्र हमेशा अपने साथ रखना चाहिए. ताकि यात्रा के दौरान कोई परेशानी न हो. प्रशिक्षण शिविर में इस बार महिला आजमीन हज भी शामिल थीं. उनके लिए पृथक व्यवस्था की गयी थी. मौलाना मुफ्ती मुर्शिद रजा की दुआ पर शिविर का समापन हुआ. कैम्प में अब्दुल कादिर, शमा परवीन, सबीहन बीबी, जान मोहम्मद, रजिया सुल्ताना, समीउद्दीन खान, हसनइमाम खान, निकहत परवीन, मो साबिर अली, मो कलामुद्दीन सहित कुल 39 महिला व पुरुष आजमीन हज ने शिरकत की. प्रशिक्षण के बाद बचे हुए आजमीन को सदर अस्पताल के प्रतिनियुक्त कर्मियों द्वारा टीका लगाया गया और प्रमाणपत्र निर्गत किया गया. शाहाब अहमद राईन, अली अहमद, मो शोएब, राहतुन नईम, अबुल हसन, हाफिज आरिफ, मोअज्जिन वसीम रजा आदि ने हज यात्रियों की बढ़ चढ़ कर सेवा की.

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